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सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना कब और किसके द्वारा की गई थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना 1934 में डॉ. राममनोहर लोहिया और अन्य सहयोगियों द्वारा की गई थी।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा इनकी प्रकृति और प्रवर्तनीयता के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में स्पष्ट रूप से यह उपबंध किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं।
2. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व गैर-न्यायोचित हैं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर अपने विभिन्न निर्णयों में यह प्रतिपादित किया है कि मूल अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि वे एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों मिलकर संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का निर्माण करते हैं।
3. संविधान में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए नीति निर्देशक तत्वों में बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना, समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता, तथा उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणाली और सिक्कों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विजयनगर साम्राज्य में केंद्रीय प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी 'महामंडलेश्वर' होता था, जो सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी था, तथा संपूर्ण साम्राज्य को प्रांतों (मंडलों), जिन्हें 'वलनाडु' और 'नाडु' में विभाजित किया गया था, में प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से बांटा गया था।
2. विजयनगर साम्राज्य की आय का मुख्य स्रोत भू-राजस्व था, जिसे सामान्यतः उपज का एक-छठवां हिस्सा (1/6th) निर्धारित किया गया था, किंतु भूमि की उर्वरता, फसल के प्रकार और सिंचाई के साधनों (जैसे नहरें और तालाब जो स्थानीय नायकों द्वारा निर्मित होते थे) के आधार पर इसमें भिन्नता पाई जाती थी।
3. कृष्णदेवराय के शासनकाल में जारी किए गए प्रसिद्ध स्वर्ण सिक्के, जिन्हें 'पगोडा' या 'वाराह' कहा जाता था, साम्राज्य की अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता के प्रतीक थे, जिन पर अक्सर कन्नड़, तेलुगु या नागरी लिपि में देवी-देवताओं के चित्र तथा राजाओं के नाम अंकित होते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'ज्वालामुखीयता' (Volcanism) और उससे निर्मित होने वाली 'आंतरिक एवं बाह्य आकृतियों' (Intrusive and Extrusive Landforms) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बथोलिथ' (Batholiths) बड़े पैमाने पर मैग्मा के ठंडे होने से बनी एक अंतर्भेदी (Intrusive) चट्टानी संरचना है, जो आमतौर पर ग्रेनाइट के रूप में पृथ्वी की गहराई में विशाल गुंबद के आकार में ठंडी होती है और यह विवर्तनिक रूप से सक्रिय पर्वतीय क्षेत्रों के मूल (Roots) का निर्माण करती है।
2. 'डाईक' (Dykes) मैग्मा के जमने से बनने वाली दीवार जैसी संरचनाएँ होती हैं, जो हमेशा तलछटी चट्टानों की परतों के समानांतर (Horizontal) रूप में क्षैतिज रूप से फैलती हैं, जबकि 'सिल्स' (Sills) या 'शीट' (Sheets) चट्टानी परतों के लंबवत (Vertical) या तिरछी दिशा में प्रवेश करती हैं।
3. 'काल्डेरा' (Caldera) अत्यधिक विस्फोटक प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार के पश्चात शंकु के धसने या विस्फोट से उड़ जाने के कारण बनने वाले विशालकाय गर्त होते हैं, जो क्रेटर (Crater) की तुलना में आकार में बहुत बड़े होते हैं और अक्सर इनमें वर्षा जल एकत्र होने से काल्डेरा झीलों का निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XX' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया (Amendment of the Constitution - Article 368) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान का संशोधन करने की पहल केवल संसद के किसी भी सदन में एक विधेयक प्रस्तुत करके की जा सकती है, और इस प्रयोजन के लिए राज्य विधानमंडलों द्वारा संशोधन विधेयक लाने की कोई शक्ति नहीं दी गई है।
2. संविधान के कुछ विशिष्ट प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया या संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार) में संशोधन के लिए यह अनिवार्य है कि विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित किए जाने के अलावा, कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थित (Ratified) किया जाए।
3. केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, संसद अनुच्छेद 368 के तहत अपनी संशोधन शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) को प्रभावित या नष्ट नहीं कर सकती है, किंतु संसद संविधान के 'भाग III' (मौलिक अधिकार) के किसी भी प्रावधान को पूर्ण रूप से निरस्त करने का असीमित अधिकार रखती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) और उससे संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति शासन की घोषणा के लिए यह आवश्यक है कि संबंधित राज्य के राज्यपाल की लिखित संस्तुति (Written Recommendation) प्राप्त हो, और राज्यपाल की रिपोर्ट के बिना राष्ट्रपति अपनी प्रेरणा से राज्य में आपातकाल की घोषणा नहीं कर सकता है।
2. राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
3. यदि संसद के दोनों सदन इसे अनुमोदित कर देते हैं, तो राष्ट्रपति शासन अधिकतम छह महीने तक जारी रह सकता है, और इसे संसद की स्वीकृति से अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक ही आगे बढ़ाया जा सकता है, जिसके लिए प्रत्येक छह महीने पर पुनः अनुमोदन आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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