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रॉलेट एक्ट (1919) के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इसे काला कानून कहा गया,
- 2. इसके विरोध में गांधीजी ने सत्याग्रह शुरू किया,
- 3. इसी समय जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ।
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Detailed Explanation
तीनों कथन रॉलेट एक्ट के संदर्भ में बिल्कुल सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत 'भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) के प्रावधानों और उनकी सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति का विस्तार उन सभी मामलों तक है जहाँ दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में, तथा ऐसे मामलों में जहाँ मृत्युदंड (Death Sentence) दिया गया हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान की शक्ति के प्रयोग (अनुच्छेद 72 के तहत) को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, और किसी भी स्थिति में न्यायालय राष्ट्रपति के इस निर्णय या उसकी दया याचिका पर लिए गए विलंब की वैधता की जांच नहीं कर सकता है।
3. राष्ट्रपति द्वारा किसी दया याचिका पर निर्णय लेते समय केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह लेना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है, और राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की सलाह के विरुद्ध जाकर अपनी व्यक्तिगत इच्छा से किसी भी दोषी को क्षमादान नहीं दे सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 142' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) प्रदान करने की शक्ति और इसके प्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए कोई ऐसी डिक्री पारित करने या ऐसा आदेश देने की शक्ति देता है जो उसके समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' करने के लिए आवश्यक हो, और ऐसा प्रत्येक आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय (Enforceable) होता है।
2. उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 142 के तहत निहित यह शक्ति अत्यंत व्यापक है, जिसके कारण यह किसी भी मौजूदा संसदीय कानून या वैधानिक प्रावधान के स्पष्ट निषेध (Express Prohibition) को भी पूरी तरह से दरकिनार कर सकती है या उसे निष्प्रभावी बना सकती है।
3. ऐतिहासिक 'अयोध्ये राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद' विवाद मामले के निर्णय सहित पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक दुर्घटनाओं और कैदियों के मानवाधिकारों जैसे कई संवेदनशील मामलों में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 142 का प्रयोग करके ऐतिहासिक और नीति-निर्धारक निर्देश जारी किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संसदीय विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges - Article 105 & 194) तथा उनकी न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के सदस्यों को सदन के भीतर और उसकी समितियों में कही गई किसी भी बात या दिए गए किसी भी मत के संबंध में देश के किसी भी न्यायालय में किसी भी कानूनी कार्यवाही से मुक्ति (Immunity) प्राप्त होती है, और यह उन्मुक्ति आपराधिक कृत्यों या भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी समान रूप से लागू होती है।
2. 'पी.वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई (1998)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया था कि यदि कोई सांसद सदन में किसी प्रस्ताव के समर्थन या विरोध में मतदान करने के लिए रिश्वत लेता है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 105(2) के अंतर्गत आपराधिक अभियोजन से पूर्ण संवैधानिक प्रतिरक्षा (Immunity) प्राप्त है।
3. 'सत्रीय कार्य समिति बनाम झारखंड मुक्ति मोर्चा (2024)' में भारत के उच्चतम न्यायालय की सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने पिछले फैसले को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसे आपराधिक कृत्य संसदीय विशेषाधिकारों की परिधि में नहीं आते हैं, और अनुच्छेद 105 या 194 सांसदों या विधायकों को ऐसे कृत्यों के लिए अदालती कार्रवाई से बचाने का लाइसेंस नहीं देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यसभा के एक सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
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क्या कैबिनेट मिशन ने भारत के विभाजन को स्वीकार किया था?
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