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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'शिक्षा का अधिकार' (Right to Education) से संबंधित है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 21A 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'अनिवार्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व' (CSR) के विधिक प्रावधानों, कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 135 तथा इससे संबंधित अनुसूचियों के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत, किसी भी वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध मूल्य (Net Worth), अथवा 1000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का टर्नओवर, अथवा 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित करने वाली कंपनियों के लिए सीएसआर (CSR) समिति का गठन करना और पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
2. कंपनियों अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII (Schedule VII) में उन विशिष्ट सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों की एक विस्तृत सूची दी गई है जिन्हें सीएसआर गतिविधियों के रूप में मान्यता दी जा सकती है, जिसके अंतर्गत पर्यावरण स्थिरता, पारिस्थितिक संतुलन की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण, और स्वच्छ भारत कोष में योगदान जैसे कार्य शामिल हैं।
3. यदि कोई पात्र कंपनी अपने निर्धारित सीएसआर व्यय को किसी वित्तीय वर्ष में पूरी तरह खर्च नहीं कर पाती है और वह राशि किसी चल रही परियोजना (Ongoing Project) से संबंधित नहीं है, तो कंपनी को ऐसी unspent CSR राशि को 30 दिनों के भीतर एक विशेष खाते में ट्रांसफर करना होगा, जिसे 'अन्स्पेंड कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉसिबिलिटी अकाउंट' (Unspent CSR Account) कहा जाता है, तथा इस राशि को 3 वर्ष के भीतर खर्च करना अनिवार्य होता है, अन्यथा इसे सरकार द्वारा निर्दिष्ट किसी निर्धारित फंड में जमा करना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) और उससे संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति शासन की घोषणा के लिए यह आवश्यक है कि संबंधित राज्य के राज्यपाल की लिखित संस्तुति (Written Recommendation) प्राप्त हो, और राज्यपाल की रिपोर्ट के बिना राष्ट्रपति अपनी प्रेरणा से राज्य में आपातकाल की घोषणा नहीं कर सकता है।
2. राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
3. यदि संसद के दोनों सदन इसे अनुमोदित कर देते हैं, तो राष्ट्रपति शासन अधिकतम छह महीने तक जारी रह सकता है, और इसे संसद की स्वीकृति से अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक ही आगे बढ़ाया जा सकता है, जिसके लिए प्रत्येक छह महीने पर पुनः अनुमोदन आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' तथा इसके न्यायिक दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय के विरुद्ध किसी विधि के तहत दिया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार प्रदान करने या दंडादेश को निलंबित, परिहरित या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए सभी दंड भी शामिल हैं।
2. 'मार्-नंदन बनाम भारत संघ (1980)' और 'एकीकृत मानवीय बनाम भारत संघ' मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग अपनी व्यक्तिगत या स्वविवेकपूर्ण निर्णय (Discretionary Power) के आधार पर करते हैं, और इसके लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद की 'सहायता और सलाह' (Aid and Advice) लेना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है।
3. 'इरम खातून बनाम भारत संघ' तथा अन्य संबंधित न्यायिक निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पूरी तरह से वर्जित है, और यदि राष्ट्रपति किसी दया याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक देरी भी करते हैं, तो न्यायालय उस निर्णय के विरुद्ध कोई भी रिट या निर्देश जारी नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की स्थापना, शक्तियों और क्षेत्राधिकार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों (प्रदूषण नियंत्रण सहित) से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और तीव्र प्रवर्तन के लिए की गई थी।
2. यह अधिकरण 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' के सख्त नियमों से बंधा नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है, और इसके पास भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को छोड़कर किसी भी उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की विशेष शक्ति प्राप्त है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि अधिकरण पर्यावरण से संबंधित किसी भी मामले या आवेदन पर विचार करने के बाद उसे अधिकतम छह महीने की अवधि के भीतर अंतिम रूप से निपटाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) की प्रकृति, इसकी सीमाओं और इससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उन्हें प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है जो लोक महत्व का है, तो वे उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करने के लिए उसे विचार हेतु संदर्भित कर सकते हैं।
2. यदि विधि या तथ्य का कोई प्रश्न अनुच्छेद 143(1) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को संदर्भित किया जाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह वैधानिक रूप से अनिवार्य है कि वह उस पर अपनी राय राष्ट्रपति को दे, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई यह सलाह राष्ट्रपति के लिए हर स्थिति में बाध्यकारी होती है।
3. 'पूर्व-संविधान' (Pre-constitution) काल की संधियों, करारों, प्रसंविदाओं या अन्य इसी प्रकार के दस्तावेजों से उत्पन्न होने वाले विवादों के संबंध में, अनुच्छेद 143(2) के तहत राष्ट्रपति के लिए सर्वोच्च न्यायालय की राय लेना अनिवार्य है, और ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय भी अपनी राय राष्ट्रपति को देने के लिए बाध्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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