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14 अप्रैल 2026 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। डॉ. बी.आर. अंबेडकर को ‘भारत रत्न’ (मरणोपरांत) किस वर्ष प्रदान किया गया था?

Detailed Explanation

डॉ. बी.आर. अंबेडकर को वर्ष 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपातकालीन उपबंध' (Emergency Provisions - Articles 352-360) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, यदि उसे इस बात का समाधान हो गया है कि युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के कारण भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा है, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था। 2. अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि उस राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकता है, और इस प्रकार की घोषणा के अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे जारी होने की तारीख से दो माह के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जाना अनिवार्य होता है। 3. अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल की घोषणा करने की शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में है, तथा वित्तीय आपातकाल की घोषणा को भी संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदन मिलना आवश्यक होता है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह अनिश्चित काल तक तब तक प्रवृत्त रहता है जब तक कि राष्ट्रपति इसे स्वयं एक नई घोषणा द्वारा वापस नहीं ले लेता। बुद्ध के जीवनकाल में राजगृह की क्या भूमिका थी? अकबर द्वारा शुरू किए गए 'दीन-ए-इलाही' धर्म का मुख्य उद्देश्य क्या था? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 311' के अंतर्गत लोक सेवकों को प्राप्त सुरक्षा और संवैधानिक संरक्षण के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 311 संघ या राज्य के अधीन सिविल पद धारण करने वाले व्यक्तियों को बर्खास्त करने, हटाने या रैंक में अवनत करने (Reduction in rank) के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है, और यह सुरक्षा न केवल सिविल सेवकों बल्कि रक्षा सेवाओं (Defence Services) के सदस्यों पर भी समान रूप से लागू होती है। 2. अनुच्छेद 311 के तहत किसी भी लोक सेवक को तब तक बर्खास्त या पदच्युत नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना देकर सुनवाई का उचित अवसर (Reasonable opportunity of being heard) न दिया गया हो। 3. इस अनुच्छेद के अंतर्गत कुछ अपवादात्मक परिस्थितियाँ भी शामिल हैं, उदाहरण के लिए, यदि किसी लोक सेवक को आपराधिक आचरण के आधार पर दोषी ठहराया जाता है, या यदि संबंधित प्राधिकारी के लिए यह व्यावहारिक नहीं है कि वह ऐसा अवसर दे, या यदि राष्ट्रपति या राज्यपाल संतुष्ट हैं कि राज्य की सुरक्षा के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' (राष्ट्रपति शासन) के उपयोग, दुरुपयोग और 'एस.आर. बोम्मय बनाम भारत संघ (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यदि किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, तो राष्ट्रपति उद्घोषणा द्वारा राज्य सरकार के कृत्यों को अपने हाथ में ले सकता है। 2. ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मय मामले' में सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन लगाने की उद्घोषणा न्यायोचित (Justiciable) है और यदि यह उद्घोषणा दुर्भावनापूर्ण (Mala fide), अप्रासंगिक या असंवैधानिक आधारों पर की जाती है, तो न्यायपालिका इसकी न्यायिक समीक्षा कर सकती है और समाप्त की गई राज्य विधानसभा को पुनः बहाल कर सकती है। 3. इसी निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी निर्धारित किया कि किसी राज्य सरकार के पास बहुमत है या नहीं, इसका परीक्षण राज्यपाल के राजभवन में बहुमत परीक्षण (Floor Test) के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि राज्यपाल के व्यक्तिपरक आकलन (Subjective Assessment) के आधार पर, और जब तक संसद के दोनों सदन इस उद्घोषणा को अपनी मंजूरी नहीं दे देते, तब तक राज्य विधानसभा को भंग या निलंबित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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