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BPSC TRE 4.0
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औरंगजेब की मृत्यु के बाद हिंदुओं पर से जजिया कर किसने हटा दिया?

Detailed Explanation

फर्रुखसियर ने 1713 में जजिया कर को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
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बिहार की राजनीति एवं प्रशासनिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बिहार विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्यों का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जिसमें एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं के निर्वाचकों द्वारा, एक-तिहाई विधानसभा सदस्यों द्वारा, एक-बारहवां भाग अध्यापकों द्वारा तथा एक-बारहवां भाग स्नातकों द्वारा चुने जाते हैं, और शेष एक-तिहाई सदस्यों को राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत किया जाता है। 2. बिहार के प्रशासनिक ढांचे में जब किसी जिले में विधि-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस प्रशासन पर नियंत्रण और दिशा-निर्देशन के लिए 'जिला दंडाधिकारी' (District Magistrate - DM) सर्वोच्च प्राधिकारी होता है, जिसके पास पुलिस अधिनियम के तहत पुलिस बल के उपयोग और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू करने की अनन्य शक्ति होती है। 3. राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) का पद बिहार सरकार के प्रशासनिक संवर्ग में सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का होता है, और यह पद मंत्रिमंडल सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होने के साथ-साथ राज्य के सभी विभागों के बीच नीतिगत समन्वय स्थापित करने का मुख्य केंद्र बिंदु होता है। 4. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के तहत 6 वर्ष की अवधि अथवा 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित किया गया है, तथा अपने पद से हटने के बाद वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्ति के पात्र होते हैं, किंतु किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष नहीं बन सकते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? वर्ष 1974 के बिहार छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में चले संपूर्ण क्रांति आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1974 में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और खाद्यान्न संकट के विरोध में पटना विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन के संचालन के लिए 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' का गठन किया गया था। 2. जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति के वैचारिक ढांचे के अंतर्गत कुल सात क्रांतियों (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, वैचारिक/नैतिक और आध्यात्मिक) को शामिल किया था। 3. जेपी ने 5 जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान की विशाल जनसभा में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियों ('सिंहासन खाली करो कि जनता आती है') का उद्घोष करते हुए संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था। 4. इस आंदोलन का दायरा केवल बिहार तक ही सीमित रहा और केंद्र सरकार ने इसके प्रभाव को देखते हुए कभी भी आपातकाल लगाने की आवश्यकता महसूस नहीं की, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से इसे स्वीकार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक इतिहास और मध्यकालीन इतिहास के संदर्भ में, सल्तनत कालीन सैन्य प्रशासन, केंद्रीय विभागों एवं 'दीवान-ए-कोही' तथा 'दीवान-ए-मुस्तखराज' जैसी प्रशासनिक इकाइयों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बिचौलियों (खوت, मुकद्दम और चौधरी) के विशेषाधिकारों को समाप्त करने के लिए 'दीवान-ए-मुस्तखराज' नामक एक नए राजस्व विभाग की स्थापना की थी, जिसका मुख्य कार्य किसानों से बकाया करों और घूसखोरी से जुड़ी धनराशियों को वसूलना था। 2. कृषि क्षेत्र के विकास और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने 'दीवान-ए-कोही' (कृषि विभाग) की स्थापना की थी, जिसके तहत किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता (तकावी ऋण या सौंदड़) दी जाती थी, किंतु यह योजना प्रशासनिक कुप्रबंधन और खराब मिट्टी के चयन के कारण विफल हो गई। 3. सल्तनत काल में सैन्य विभाग 'दीवान-ए-आरिज' के अंतर्गत 'आरिज-ए-मुमालिक' सैनिकों के वेतन का निर्धारण सीधे नकद रूप में करता था, तथा अलाउद्दीन खिलजी द्वारा सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए घोड़ों को दागने की प्रथा (दाग) और सैनिकों का वर्णनात्मक हुलिया लिखने की प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया गया था। 4. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत कालीन सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करते हुए सैनिकों को भूमि के बदले जागीर देने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया और केवल नकद वेतन भुगतान प्रणाली को ही संपूर्ण साम्राज्य में अनिवार्य कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था में 'केन्द्र-राज्य वित्तीय संबंधों' और 'कर प्रणाली' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ सूची में उल्लिखित करों का संग्रहण केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है, किंतु उनका शुद्ध आगम केन्द्र और राज्यों के बीच विभाजित होता है, जिसमें उपकर (Cesses) और अधिभार (Surcharges) भी इस विभाज्य पूल (Divisible Pool) का अनिवार्य हिस्सा होते हैं। 2. वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद 279क के तहत किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता केन्द्रीय वित्त मंत्री करते हैं, और इसमें प्रत्येक राज्य के वित्त मंत्री या उनके द्वारा नामित मंत्री इसके सदस्य होते हैं। 3. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 282 केन्द्र और राज्यों को किसी भी लोक प्रयोजन के लिए वित्तीय अनुदान (Grants-in-aid) देने की शक्ति प्रदान करता है, जिसके तहत केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को योजनागत या गैर-योजनागत सहायता प्रदान करती है। 4. वित्त आयोग (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय है, जो अनुच्छेद 280 के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष पर या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है, और इसकी सिफारिशें केन्द्र सरकार के लिए प्रकृति में पूरी तरह से बाध्यकारी (Binding) होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? नीति आयोग के अनुसार, वर्ष 2021-22 में, निम्न राज्यों में से किस एक में मल्टीडाइमेंशनल पावर्टी इन्डेक्स (एमपीआई) सबसे निम्न था?
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