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History of India
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"हनूज दिल्ली दूर अस्त" (अभी दिल्ली दूर है) का प्रसिद्ध संवाद किसके लिए कहा गया था?

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निजामुद्दीन औलिया ने गयासुद्दीन तुगलक के लिए कहा था।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई सुनियोजित अखिल भारतीय राजनीतिक दृष्टिकोण था और न ही भविष्य के आधुनिक प्रशासनिक व सामाजिक ढांचे का कोई स्पष्ट वैकल्पिक खाका, जिसके कारण यह विशुद्ध रूप से सत्ता के विकेंद्रीकृत और पारंपरिक ताकतों का संघर्ष बनकर रह गया। 2. यद्यपि मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक रूप से भारत का सम्राट घोषित किया गया था, किंतु विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों (जैसे झाँसी, कानपुर, लखनऊ और आरा) के विद्रोही नेताओं के बीच किसी भी प्रकार के केंद्रीय समन्वय, दीर्घकालिक सैन्य योजना और रणनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था। 3. अधिकांश आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, पश्चिम-शिक्षित बुद्धिजीवियों तथा अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, सिंधिया, होलकर और नेपाल के राणा) ने ब्रिटिश सत्ता के साथ निष्ठा बनाए रखी और विद्रोहियों के दमन में अंग्रेजों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय सहायता प्रदान की। 4. विद्रोह का भौगोलिक और सामाजिक प्रसार मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तथा पारंपरिक सैनिकों तक ही सीमित रहा, जबकि दक्षिण भारत, पंजाब और पश्चिमी भारत का अधिकांश भाग या तो शांत रहा या अंग्रेजों के प्रति वफादार बना रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में, माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत भारत के विभाजन को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया और इसके अंतर्गत बंगाल तथा पंजाब विधानसभाओं में यह निर्णय लिया गया कि यदि दोनों में से किसी भी प्रांत के हिंदू और मुस्लिम विधायक साधारण बहुमत से प्रांत के विभाजन के पक्ष में मतदान करेंगे, तो प्रांत को विभाजित कर दिया जाएगा। 2. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' को बिना किसी संशोधन के पारित किया गया, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन राष्ट्रों के सृजन की घोषणा की गई। 3. भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का निर्धारण करने के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (बंगाल और पंजाब) का गठन किया गया था, जिन्होंने अपनी अंतिम रिपोर्ट 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही सार्वजनिक कर दिया था। 4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं को निर्धारित करने वाले 'रेडक्लिफ पुरस्कार' (Radcliffe Award) की घोषणा 17 अगस्त 1947 को, यानी भारत और पाकिस्तान के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस के ठीक दो दिन पश्चात की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्वामी बना दिया गया और भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिससे किसानों की स्थिति मात्र किराएदार जैसी हो गई। 2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें बीच के किसी भी बिचौलिए को मान्यता नहीं दी गई थी और किसानों को भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया गया था। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण की इकाई व्यक्तिगत किसान को न बनाकर पूरे गाँव या 'महाल' को बनाया गया था, जिसमें संपूर्ण ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी होता था। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि ब्रिटिश सरकार ने कभी भी अत्यधिक उच्च राजस्व दरों का निर्धारण नहीं किया और हमेशा किसानों की भुगतान क्षमता तथा फसल की वास्तविक पैदावार को सर्वोपरि रखा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों, उनके संप्रदायों तथा संगीतियों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, ज्ञान की सापेक्षता को स्वीकार किया जाता है जिसके तहत किसी भी वस्तु के सात अलग-अलग दृष्टिकोण (सप्तभंगी नय) हो सकते हैं, जबकि बौद्ध धर्म ने 'मध्यम प्रतिपदा' (मज्झिमा पतिपदा) का मार्ग अपनाते हुए शाश्वतवाद और उच्छेदवाद दोनों अतिवादी दृष्टिकोणों का खंडन किया है। 2. बौद्ध धर्म की चतुर्थ बौद्ध संगीति के दौरान बौद्ध संघ स्पष्ट रूप से 'स्थविरवादी' और 'महासांगिक' नामक दो प्रारंभिक विरोधी शाखाओं में विभाजित हो गया था, जबकि जैन धर्म में श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदाय का यह विभाजन मुख्य रूप से प्रथम जैन संगीति (पाटलिपुत्र) के दौरान हुआ था। 3. जैन दर्शन में कर्म के बंधन से मुक्ति के लिए 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) का विधान किया गया है, जबकि बौद्ध धर्म के 'अष्टांगिक मार्ग' (मध्यम मार्ग) में सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि को शामिल किया गया है। 4. बौद्ध धर्म के हीनयान संप्रदाय के अंतर्गत बुद्ध को केवल एक महापुरुष और शिक्षक माना गया है जिनकी पूजा प्रतीकों के रूप में की जाती है, जबकि महायान संप्रदाय में बुद्ध को भगवान मानकर उनकी मूर्तियों की पूजा और बोधिसत्वों की परिकल्पना को स्वीकार किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बाजीराव प्रथम ने बुंदेलखंड के किस राजा की सहायता मोहम्मद खाँ बंगश के विरुद्ध की थी?
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