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History of India
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सुल्तान ने किसानों को बीज और औजार खरीदने के लिए जो ऋण दिया था, उसे क्या कहते थे?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
किसानों को दिए जाने वाले ऋण को तकावी कहा जाता था।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा किया गया था, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता था, और इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश सेनापति कर्नल कैंपबेल थे।
2. बरेली में रोहिल्ला सेना के अंतिम शासक के वंशज खान बहादुर खान ने विद्रोह का प्रभावी नेतृत्व किया था, तथा बरेली पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व सर कॉलिन कैंपबेल ने किया था।
3. इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जहाँ उन्होंने स्थानीय जनता को संगठित किया, किंतु शीघ्र ही जनरल नील ने अत्यधिक क्रूरता के साथ इस विद्रोह का पूर्ण दमन कर दिया।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों द्वारा 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था, और अंततः पुवयाँ के राजा के विश्वासघात के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसके परिणामस्वरूप पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने अत्यधिक दमनकारी कार्रवाई करते हुए पीर अली खान सहित कई विद्रोहियों को फांसी पर लटका दिया था।
2. दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए थे।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) में विद्रोह की आग भड़कने के बाद यूरोपीय अधिकारियों और नागरिकों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली, और छपरा में स्थानीय जमींदारों तथा मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी गई थी।
4. दानापुर के सिपाहियों के विद्रोह के तुरंत बाद अंग्रेजों ने बाबू कुंवर सिंह की बढ़ती लोकप्रियता और सैन्य क्षमता को देखते हुए उन्हें पटना के कमिश्नर कार्यालय में प्रशासनिक सलाहकार के रूप में नियुक्त करने का औपचारिक प्रस्ताव भेजा था जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, दार्शनिक मान्यताओं तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय मुख्य रूप से आलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों को जाता है, जिन्होंने अपनी रचनाओं में जाति-पाति के कठोर बंधनों की आलोचना की तथा तमिल भाषा को भक्ति के प्रचार का माध्यम बनाया, जिससे अलवर संत आंदाल को 'दक्षिण की मीरा' के रूप में जाना गया।
2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार), कबीर (जुलाहा), और सेना (नाई) जैसे समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को सम्मिलित किया, तथा उन्होंने संस्कृत के स्थान पर लोकभाषा (हिंदी/अवधी) को उपदेश का माध्यम बनाया।
3. सूफी मत (तसव्वुफ़) के चिश्ती सिलसिले की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण, शाही दरबारों के साथ निकट संबंध और भारी मात्रा में जागीरें स्वीकार करने की नीति का कड़ाई से पालन किया ताकि वे गरीबों की सेवा कर सकें।
4. महान सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में समकालीन सात सुल्तानों का शासनकाल देखा गया, किंतु उन्होंने कभी भी किसी सुल्तान के दरबार में प्रवेश नहीं किया और 'सुल्तान-उल-मशाइख' की उपाधि से विभूषित हुए, जबकि उनके प्रिय शिष्य अमीर खुसू ने फारसी कविता में भारतीय शैली (सबक-ए-हिन्दी) का सूत्रपात किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, कला-संस्कृति तथा विज्ञान के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'कुमारामार्त्य' सबसे महत्वपूर्ण प्रांतीय और केंद्रीय अधिकारी होते थे, जिनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा की जाती थी, और इन्हें प्रशासनिक सुविधा के लिए 'विषय' (ज़िलों) के प्रशासन से भी जोड़ा जाता था जिनका प्रमुख 'विषयपति' कहलाता था।
2. इस काल में तांबे के सिक्कों की तुलना में सोने के सिक्के (दीनार) बहुत कम मात्रा में जारी किए गए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह से समाप्त हो चुका था और अर्थव्यवस्था पूरी तरह वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित हो गई थी।
3. गुप्तकालीन वास्तुकला में पहली बार ईंटों और पत्थरों से बने पक्के मंदिरों के निर्माण की शुरुआत हुई, जिसमें उत्तर भारत में 'नागर शैली' के मंदिरों (जैसे देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भुमाराम का शिव मंदिर) का उत्कृष्ट विकास देखने को मिलता है।
4. गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक 'आर्यभटिय' में पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने (घूर्णन) तथा सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के वास्तविक वैज्ञानिक कारणों का प्रतिपादन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदउल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है, और इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील द्वारा किया गया था।
2. रोहिलखंड की राजधानी बरेली में विद्रोह का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया था, जिन्होंने अपनी सरकार स्थापित की थी, तथा बाद में सर कॉलिन कैंपबेल ने इस विद्रोह का क्रूरता से दमन किया था।
3. इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने वहाँ स्वतंत्रता की घोषणा की थी, और इस ऐतिहासिक नगर तथा कछार क्षेत्र से विद्रोह को कुचलने का श्रेय ब्रिटिश सेनापति जनरल नील को जाता है।
4. खान बहादुर खान और मौलवी लियाकत अली दोनों को ब्रिटिश सेना द्वारा युद्ध के मैदान में ही मार गिराया गया था और वे कभी जीवित नहीं पकड़े गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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