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History of India
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इतिहासकारों ने मोहम्मद बिन तुगलक को क्या कहकर संबोधित किया है?

Detailed Explanation

ये सभी विशेषण तुगलक के व्यक्तित्व पर लागू होते हैं।
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मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों ने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (अग्रहार व्यवस्था) देने की परंपरा को बड़े पैमाने पर आरंभ किया, तथा सातवाहन राजाओं के सिक्के मुख्यतः सीसे, प्रोटीन, तांबे और कांसे के बने होते थे। 2. गुप्त काल में भूमि के स्वामित्व और उसके प्रशासन का विवरण देने वाले अभिलेखों में 'निवर्तना' और 'द्रोणवाप' जैसे माप के पैमानों का उल्लेख मिलता है, जो भूमि की पैमाइश और उसकी उत्पादकता से संबंधित थे। 3. गुप्त राजवंश के दौरान हूणों के आक्रमणों का सामना करने वाले और उन्हें पराजित करने वाले प्रमुख शासक कुमारगुप्त प्रथम और स्कंदगुप्त थे, जिनके सिक्कों और अभिलेखों (जैसे भीतरी स्तंभ लेख) में हूण आक्रमणों का स्पष्ट विवरण मिलता है। 4. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक इकाइयों का सही अवरोही क्रम 'भुक्ति' (प्रतीक/प्रांत), 'विषय' (जिला), 'वीथी' (उप-जिला) और 'ग्राम' (सबसे छोटी इकाई) था, जिसके प्रशासनिक प्रमुखों को क्रमशः उपरिक, विषयपति और ग्रामिक कहा जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल में "परगना" का प्रमुख था: महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके प्रारंभिक सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर चंपारण पहुँचे गांधीजी ने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल संघर्ष किया। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भू-राजस्व में छूट न दिए जाने और लगान वसूलने की नीति के खिलाफ किसानों को 'लगान न दो' (No-Tax Campaign) का आह्वान किया, जिसमें इंदुलाल याग्निक और वल्लभभाई पटेल ने उनका सक्रिय सहयोग किया। 3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया, जिससे कांग्रेस के भीतर तीव्र असंतोष उत्पन्न हुआ और चित्तरंजन दास तथा मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की। 4. चंपारण सत्याग्रह के सफल समापन के बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की राजनीतिक कार्यशैली से प्रभावित होकर उन्हें पहली बार सार्वजनिक रूप से 'महात्मा' की उपाधि से विभूषित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के वैचारिक तथा ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सिंगापुर में जापानी साम्राज्यवादी सेना के सहयोग से रास बिहारी बोस और कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) का पुनर्गठन कर उसका सर्वोच्च राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपा गया था, जिन्होंने वर्ष 1943 में सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी। 2. सुभाष चंद्र बोस द्वारा सिंगापुर से 'आज़ाद हिंद रेडियो' के माध्यम से प्रसारित किए गए एक ऐतिहासिक संदेश में महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा गया था, और आज़ाद हिंद फौज की सैन्य टुकड़ियों के नामकरण गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और खुद सुभाष चंद्र बोस के नाम पर किए गए थे, तथा महिलाओं की रेजिमेंट का नाम 'झांसी की रानी रेजिमेंट' रखा गया था। 3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के भीतर वामपंथी समाजवादी नेताओं (जैसे जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया) और भूमिगत कार्यकर्ताओं ने सुभाष चंद्र बोस की फॉरवर्ड ब्लॉक विचारधारा का समर्थन किया था, जबकि महात्मा गांधी और मुख्यधारा के कांग्रेस नेतृत्व ने धुरी राष्ट्रों (विशेषकर जापान और जर्मनी) के सैन्य सहयोग से भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करने की सुभाष चंद्र बोस की रणनीति का पूर्ण समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? विजयनगर साम्राज्य में "गणिकाओं" (Courtesans) पर लगने वाले कर का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता था?
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