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History of India
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सल्तनत काल का वह सुल्तान कौन था जिसने अपनी आत्मकथा "फतुहात-ए-फिरोजशाही" लिखी थी?

Detailed Explanation

फिरोज तुगलक ने अपनी जीवनी खुद लिखी थी।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और अष्टप्रधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' के अंतर्गत प्रत्येक मंत्री प्रशासनिक और सैन्य मामलों में सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, किंतु ये पद वंशानुगत नहीं थे और आवश्यकता पड़ने पर अधिकांश मंत्रियों को सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था। 2. 'चौथ' मराठा साम्राज्य के स्वराज्य (प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले क्षेत्र) से वसूला जाने वाला मुख्य भू-राजस्व कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' उस बाहरी क्षेत्र से वसूला जाता था जहाँ मराठों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था बल्कि वे उसकी सुरक्षा का आश्वासन देते थे। 3. शिवाजी की राजस्व प्रणाली काफी हद तक मलिक अंबर की दक्कनी राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके तहत भूमि की पैमाइश करवाकर राज्य का हिस्सा कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत निर्धारित किया गया था। 4. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' धार्मिक और न्यायिक मामलों के सर्वोच्च अधिकारी थे, और इन दोनों पदों को छोड़कर अन्य सभी छह मंत्रियों को अपने प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ युद्ध के समय सेना का नेतृत्व करना अनिवार्य होता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), कराची कांग्रेस अधिवेशन (1931) और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तुरंत बाद आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया था। 2. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, और इस सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित 'साम्प्रदायिक अधिनियर्ण' (Communal Award) के प्रावधानों पर गांधीजी के साथ गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। 3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन के बहिष्कार के बावजूद, कांग्रेस ने वर्ष 1931 के अंत में हुए द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में वायसरॉय लॉर्ड विलिंगडन के साथ हुए विशेष समझौते के तहत भाग लिया था, जबकि तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932) का कांग्रेस ने पूर्ण रूप से बहिष्कार किया था। 4. वर्ष 1932 में जब सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत हुई, तब ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया और गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेताओं को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके परिणामस्वरूप प्रारंभ हुए 'स्वदेशी आंदोलन' के वैचारिक, आर्थिक तथा संगठनात्मक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन की घोषणा के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' (Boycott Resolution) पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं का त्याग कर स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देना था। 2. बंगाल विभाजन औपचारिक रूप से 16 अक्टूबर 1905 को लागू हुआ, और इस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया जहाँ लोगों ने उपवास रखा, गंगा स्नान किया और एक-दूसरे की कलाइयों पर एकता के प्रतीक के रूप में राखी बांधी। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान रचनात्मक कार्यों और आत्मनिर्भरता (आत्मशक्ति) के तहत राष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम प्राचार्य (Principal) अरबिंदो घोष (अरबिंद घोष) नियुक्त किए गए थे। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के पारंपरिक ग्रामीण मेलों (जैसे मजेरहाट मेला) को लोक-संस्कृति, राजनीतिक प्रचार और स्वदेशी उत्पादों की बिक्री का माध्यम बनाया गया, किंतु मुस्लिम किसानों को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए मौलाना लियाकत अली और अब्दुल रसूल जैसे नेताओं ने कोई प्रयास नहीं किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मलिक काफूर ने अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद लगभग कितने दिनों तक शासन का वास्तविक नियंत्रण अपने हाथ में रखा? मुगल प्रशासन में "कोतवाल":
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