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History of India
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फिरोज शाह तुगलक ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए सरकारी पदों को कैसा बना दिया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उसने सरकारी पदों को वंशानुगत कर दिया था।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संस्थाओं, उनके संस्थापकों तथा उनके वैचारिक उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. तत्त्वबोधिनी सभा (1839) - देवेंद्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रचार करना और ब्रह्म समाज के वैचारिक आधार को अधिक सुदृढ़ करना था।
2. सेवा सदन (1885) - बहरामजी एम. मलाबारी और दियाराम गिदूमल द्वारा स्थापित, जिसका प्रमुख उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता करना तथा बाल विवाह और परदा प्रथा का विरोध करना था।
3. देव समाज (1887) - शिवनारायण अग्निहोत्री द्वारा लाहौर में स्थापित, जिसका उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, उच्च नैतिक आचरण तथा गुरु की सर्वोच्चता पर बल देना था।
4. सोशल सर्विस लीग (1911) - गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा बॉम्बे में स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक सेवा के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ता तैयार करना और आपदा राहत कार्य चलाना था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की कृषि व्यवस्था, शिल्प उत्पादन और दूर-दराज के क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के लोग विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन करते थे, जिसमें जौ (Barley) मुख्य फसल थी, इसके अतिरिक्त गेहूँ, मटर, तिल, सरसों और लोथल से प्राप्त चावल के साक्ष्य भी मिलते हैं, किंतु गन्ने की खेती का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
2. बनावली और हड़प्पा स्थलों से मिट्टी के बने हल के प्रतिरूप (Terracotta plough) प्राप्त हुए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि खेतों की जुताई के लिए लकड़ी या हल के उपयोग की परंपरा थी, और कालीबंगा से जुते हुए खेत (Ploughed field) के साक्ष्य मिले हैं जहाँ एक ही समय में दो अलग-अलग फसलें उगाई जाती थीं।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के शिल्पी मनके (Beads) बनाने की कला में अत्यधिक दक्ष थे; चन्हूदड़ो और लोथल मनके बनाने के प्रमुख केंद्र थे, जहाँ कारनेलियन, जैस्पर, शंख, तांबा और स्टीटाइट (सेलखड़ी) जैसी सामग्रियों का उपयोग करके विभिन्न आकार के मनके तैयार किए जाते थे।
4. मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग किया गया है, और वहाँ से प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार मेसोपोटामिया के व्यापारी सिंधु क्षेत्र के साथ प्रत्यक्ष समुद्री व स्थलीय व्यापार करते थे, जिसमें लापिस लाजुली, सोना, चांदी और तांबे का मुख्य रूप से आयात-निर्यात किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न सैन्य अधिकारियों द्वारा विद्रोह के दमन किए जाने वाले क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन एवं हडसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल एवं हेनरी लॉरेंस
3. कानपुर - सर ह्यू व्हीलर एवं कॉलिन कैंपबेल
4. झांसी एवं ग्वालियर - सर ह्यू रोज
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया और सरकार के लिए राजस्व की मांग को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिसके कारण कंपनी की आय तो स्थिर हो गई, किंतु कृषि प्रसार और किसानों के कल्याण की दिशा में जमींदारों ने कोई निवेश नहीं किया।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और रयत (किसान) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें राजस्व निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर 30 वर्षों के लिए निश्चित किया जाता था और लगान न चुकाने पर किसानों को भूमि से बेदखल करने का अधिकार सरकार के पास था।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिक के कार्यकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' में व्यक्तिगत किसानों के साथ कर अनुबंध किया जाता था, और पूरे गाँव या महाल के राजस्व संग्रह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी गाँव के मुखिया या लंबरदार की होती थी।
4. इन तीनों प्रणालियों के परिणामस्वरूप पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विघटन हुआ, कृषि का अत्यधिक वाणिज्यीकरण हुआ और ग्रामीण जनता बुरी तरह कर्ज के जाल में फंस गई, जिससे महाजनों और साहूकारों का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अप्रैल 1858 में वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेनापति कैप्टन ली ग्रांड को आज़मगढ़ के पास बुरी तरह पराजित किया था, हालांकि इसी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में उनका निधन हो गया था।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापेमार युद्ध) जारी रखा और शाहाबाद के क्षेत्र में एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था एवं सरकार की स्थापना की थी।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारी मेजर विंसेंट आयर और जनरल डगलस ने भारी सैन्य बल का प्रयोग किया, तथा अमर सिंह को पकड़ने में मदद करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन पर भारी इनाम भी घोषित किया था।
4. अमर सिंह को अंततः ब्रिटिश सेना द्वारा युद्ध के मैदान में ही मार गिराया गया था, जिसके बाद बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम लौ हमेशा के लिए बुझ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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