General Science
Asked 10 hours ago · Viewed 0 times
सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिकांगों और कोशिका विभाजन की सूक्ष्म संरचनात्मक गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं जिनमें 70S प्रकार के राइबोसोम और वृत्ताकार (Circular) द्विरज्जुकी डीएनए पाए जाते हैं, जिसके कारण ये अपनी कुल प्रोटीन आवश्यकता का अधिकांश भाग स्वयं संश्लेषित कर लेते हैं।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पादप कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य का विभाजन (Cytokinesis) सेल प्लेट पद्धति द्वारा होता है, जिसमें गोलगी बॉडी द्वारा स्रावित पुटिकाएँ (Vesicles) मध्य रेखा पर संकेंद्रित होकर अभिकेंद्रीय (Centripetal) रूप से केंद्र की ओर बढ़ती हैं।
- 3. समसूत्री विभाजन (Mitosis) के एनाफेज (Anaphase) चरण के दौरान, सेंट्रोमियर का विभाजन होता है और 'sister chromatids' अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिसमें यह गति मुख्य रूप से काइनेटोकोर माइक्रोट्यूब्यूल्स के विसंसंजन (Depolymerization) के कारण होती है।
- 4. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था में 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम की उपस्थिति में सजातीय गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिससे काइऐस्माटा (Chiasmata) का निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग हैं जिनमें स्वयं का वृत्ताकार द्विरज्जुकी डीएनए और 70S राइबोसोम होते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि पादप कोशिकाओं में साइटोकाइनेसिस सेल प्लेट पद्धति द्वारा होता है, किंतु यह प्रक्रिया अपकेंद्रीय (Centrifugal) होती है, न कि अभिकेंद्रीय (केंद्र की ओर बढ़ने वाली नहीं, बल्कि केंद्र से परिधि की ओर बढ़ने वाली)। कथन 3 सही है, एनाफेज में सेंट्रोमियर के विभाजन के बाद सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होते हैं और काइनेटोकोर माइक्रोट्यूब्यूल्स के डिपोलीमराइजेशन के कारण ध्रुवों की ओर गति करते हैं। कथन 4 सही है, पैकाइटीन अवस्था में क्रॉसिंग ओवर और रिकॉम्बिनेज की सक्रियता से आनुवंशिक विनिमय होता है और डिप्लोटीन अवस्था में काइऐस्माटा स्पष्ट होते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
अगला प्रश्न →
मानव शरीर में होने वाले विभिन्न रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके उपचार या…
← पिछला प्रश्न
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक एवं भौतिक…
Related Questions
→
मानव परिसंचरण तंत्र में रक्त कोशिकाओं (RBC, WBC) के जीवनकाल, उनके निर्माण स्थल तथा रक्त स्कंदन (Blood coagulation) की जैव-रासायनिक क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) का औसत जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है, जिसके पश्चात वे प्लीहा (Spleen) में नष्ट हो जाती हैं, जिसे 'RBC का कब्रिस्तान' कहा जाता है, तथा भ्रूणीय अवस्था में इनका निर्माण यकृत और प्लीहा में होता है जबकि वयस्क अवस्था में यह मुख्य रूप से लाल अस्थिमज्जा (Red bone marrow) में बनती हैं।
2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया (Coagulation cascade) में प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बोप्लास्टिन में बदलने के लिए थ्रॉम्बिन एंजाइम और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की आवश्यकता होती है, जो अंततः घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में परिवर्तित कर देते हैं।
3. श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) में सबसे अधिक संख्या में पाई जाने वाली कणिकामय कोशिकाएँ (Granulocytes) 'न्यूट्रोफिल्स' होती हैं जो phagocytic प्रकृति की होती हैं, जबकि अणुकणिकामय (Agranulocytes) कोशिकाओं में लिम्फोसाइट्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Antibody-mediated and cell-mediated immunity) के लिए उत्तरदायी होती हैं।
4. रक्त प्लेटलेट्स (Thrombocytes), जिन्हें मेगाकैरीोसाइट्स (Megakaryocytes) के विखंडन से अस्थिमज्जा में बनाया जाता है, रक्त वाहिकाओं की अंतःकला (Endothelium) द्वारा स्रावित 'प्रोस्टासाइक्लिन' (Prostacyclin) और 'हेपरिन' की उपस्थिति के कारण सामान्य अवस्था में वाहिकाओं के भीतर स्वतः थक्का नहीं बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक यौगिक (Electrovalent compounds) सामान्यतः ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन क्रिस्टल जालक में स्थिर वैद्युत आकर्षण बलों द्वारा दृढ़ता से बंधे होते हैं, किंतु गलित (Molten) अवस्था या जलीय विलयन में वे विद्युत का चालन करते हैं।
2. लुईस अम्ल (Lewis acids) वे रासायनिक प्रजातियाँ होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण (Electron-pair acceptors) कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता (Electron-pair donors) होते हैं, और इस अवधारणा के अनुसार $BF_3$ एक लुईस अम्ल है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के तहत किसी अम्ल का 'संयुग्मी क्षार' (Conjugated base) उस प्रजाति को कहा जाता है जो अम्ल द्वारा प्रोटॉन ($H^+$) त्यागने के पश्चात शेष बचती है, तथा प्रबल अम्लों के संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल होते हैं।
4. जल-अपघटन (Hydrolysis) के दौरान सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$) जैसे लवण का जलीय विलयन अम्लीय प्रकृति का होता है, क्योंकि इसमें दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के बीच उदासीनीकरण होता है जिससे हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की केशिका नली में ऊपर चढ़ने की ऊँचाई ($h$) केशिका नली की त्रिज्या ($r$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और यदि किसी कृत्रिम उपग्रह के अंदर भारहीनता की स्थिति हो, तो केशिका नली में द्रव नली की पूरी लंबाई तक ऊपर चढ़ जाएगा बशर्ते नली का सिरा जल में डूबा हो।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह आंतरिक गुण है जिसके कारण वे अपनी विभिन्न परतों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करते हैं, और तापमान बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घटती है जबकि गैसों की श्यानता बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावक बल का अनुभव करती है, जिसका केंद्र विस्थापित तरल के द्रव्यमान केंद्र पर संकेंद्रित होता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' कहते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, पृष्ठ तनाव (Surface tension) किसी द्रव के पृष्ठ पर एकांक लंबाई पर लगने वाला बल है, और जब पानी में कुछ डिटर्जेंट या साबुन मिलाया जाता है, तो पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है जिससे जल की पृष्ठ ऊर्जा घट जाती है और मैल अधिक आसानी से बाहर निकल जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
तरंग गति, डॉप्लर प्रभाव और ध्वनि तरंगों के संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल गैस के दाब (Pressure) पर निर्भर नहीं करती है, क्योंकि तापमान नियत रहने पर दाब में परिवर्तन के साथ घनत्व में भी आनुपातिक परिवर्तन हो जाता है, जिससे न्यूटन-लाप्लास के सूत्र के अनुसार ध्वनि का वेग स्थिर रहता है।
2. जब कोई ध्वनि स्रोत श्रोता की ओर गति करता है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति का मान वास्तविक आवृत्ति से अधिक होता है, और यह डॉप्लर प्रभाव केवल ध्वनि तरंगों के लिए ही लागू होता है, प्रकाश या विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए इसका कोई अस्तित्व नहीं है।
3. अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोस और द्रवों के मुक्त पृष्ठों पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं क्योंकि इनमें अपरूपण प्रतिबल (Shear stress) सहन करने की क्षमता होती है, जबकि गैसों में अपरूपण प्रतिबल सहन करने की क्षमता न होने के कारण अनुप्रस्थ तरंगें गैसों के भीतर संचरित नहीं हो सकतीं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, अनुदैर्ध्य तरंगों के संचरण के दौरान माध्यम में संपीड़न (Compression) वे क्षेत्र होते हैं जहाँ दाब और घनत्व दोनों का मान औसत मान से न्यूनतम होता है, जबकि विरलन (Rarefaction) के क्षेत्रों में दाब और घनत्व अधिकतम होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.