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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय की दर (Rate of decay) उस समय उपस्थित अप्रतिलक्षित नाभिकों की कुल संख्या के सीधे समानुपाती होती है, और इसका अर्द्ध-आयु काल (Half-life) उस नाभिक के प्रारंभिक द्रव्यमान और तापमान पर निर्भर करता है।
  2. 2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान उत्पन्न 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) जैसे कैडमियम या बोरॉन का उपयोग श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए न्यूट्रॉनों को अवशोषित करने हेतु किया जाता है, जबकि मंदक (Moderator) के रूप में भारी पानी न्यूट्रॉनों की गति को तेज करता है।
  3. 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, तारों (जैसे सूर्य) में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं और इस प्रक्रिया में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
  4. 4. बीटा-क्षय ($eta^-$ decay) के दौरान नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में परिवर्तित होता है, जिससे परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है और द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है, तथा इस प्रक्रिया में एक एंटीन्यूट्रिनो का उत्सर्जन होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ का अर्द्ध-आयु काल (Half-life) एक नियतांक है जो उसके प्रारंभिक द्रव्यमान, दाब या तापमान जैसे बाहरी भौतिक और रासायनिक कारकों पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह पूरी तरह से नाभिक के आंतरिक गुणों पर निर्भर होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि परमाणु रिएक्टर में मंदक (Moderator जैसे भारी पानी या ग्रेफाइट) का कार्य तीव्र गति वाले न्यूट्रॉनों की गति को धीमा (मंद) करना होता है, न कि उन्हें तेज करना। कथन 3 सत्य है, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है। कथन 4 पूरी तरह सत्य है कि $eta^-$ क्षय में एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में बदलता है, परमाणु क्रमांक 1 से बढ़ता है और एंटीन्यूट्रिनो उत्सर्जित होता है।
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