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विद्युत परिपथों, ओम के नियम और प्रतिरोधकों के संयोजन (Combination of Resistors) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी धात्विक चालक के लिए ओम का नियम तभी वैध होता है जब चालक का भौतिक तापमान और अन्य भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहें, और इस नियम के अनुसार विभवांतर ($V$) तथा विद्युत धारा ($I$) का अनुपात नियत रहता है जिसे प्रतिरोध कहते हैं।
  2. 2. जब तीन प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है, तो संयोजन का कुल समतुल्य प्रतिरोध ($R_{eq}$) परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोधक के मान से भी अधिक होता है।
  3. 3. किर्चऑफ़ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी विद्युत परिपथ की किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
  4. 4. किसी विद्युत बल्ब का फिलामेंट टंगस्टन धातु का बना होता है जिसका गलनांक उच्च और प्रतिरोधकता कम होती है, और विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यह जूल के ताप प्रभाव पर कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ओम का नियम (Ohm's law) नियत ताप और भौतिक परिस्थितियों में ही लागू होता है जहाँ $V/I = R$ एक नियतांक है। कथन 2 गलत है क्योंकि समांतर क्रम (Parallel) में जुड़े प्रतिरोधकों का समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोधक के मान से भी कम होता है (जबकि श्रेणी क्रम में यह अधिकतम से भी अधिक होता है)। कथन 3 सही है, किर्चऑफ़ का प्रथम नियम (KCL) आवेश संरक्षण (Conservation of Charge) पर आधारित है। कथन 4 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि टंगस्टन की प्रतिरोधकता कम नहीं बल्कि उच्च होती है, हालांकि इसका गलनांक उच्च होता है। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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