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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) की गैर-सह-भ्रातृ गुणसूत्रिकाओ (Non-sister chromatids) के बीच अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन अवस्था में होती है।
- 2. क्रॉसिंग ओवर के दौरान आनुवंशिक सामग्री के आदान-प्रदान के लिए उत्तरदायी एंजाइम को 'रेकॉम्बिनेज' (Recombinase) कहा जाता है, जो डीएनए स्ट्रैंड के टूटने और जुड़ने को उत्प्रेरित करता है।
- 3. दो जीनों के बीच पुनרו संयोजन आवृत्ति (Recombination frequency) का मान इस बात पर निर्भर करता है कि गुणसूत्र पर वे जीन एक-दूसरे से कितनी दूर स्थित हैं, और दूरी बढ़ने पर पुनרו संयोजन की संभावना घट जाती है।
- 4. मूरगन (Morgan) द्वारा ड्रोसोफिला पर किए गए प्रयोगों से यह ज्ञात हुआ कि लिंकेज (सहलग्नता) की ताकत और पुनर्संयोजन आवृत्ति एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन विनिमय (Crossing Over) लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) का एक प्रमुख कारण है। यह अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों की नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच खंडों के आदान-प्रदान से होता है, जिसमें 'रेकॉम्बिनेज' एंजाइम मुख्य भूमिका निभाता है। पुनर्संयोजन आवृत्ति (Recombination Frequency) गुणसूत्र पर स्थित जीनों के बीच की दूरी के सीधे समानुपाती होती है—यानी दूरी बढ़ने पर पुनर्संयोजन बढ़ता है और सहलग्नता (Linkage) घटती है। अतः कथन 3 गलत है क्योंकि दूरी बढ़ने पर पुनर्संयोजन की संभावना बढ़ती है, घटती नहीं है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जिसके कारण परमाणु त्रिज्या लगातार घटती है, लेकिन उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) का वान डेर वाल्स आकार उनके ठीक पहले के हैलोजन तत्वों की तुलना में बड़ा होता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे जाने पर घटता है, और क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान फ्लोरीन की तुलना में कम होता है क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होने के कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षणा बल अधिक होता है।
3. आवर्त सारणी के किसी भी आवर्त में आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का मान लगातार एकसमान रूप से नहीं बढ़ता है, उदाहरण के लिए बोरॉन की आयनन एन्थैल्पी बेरिलियम से कम होती है क्योंकि बेरिलियम का $2s$ कक्षक पूरी तरह से भरा होता है।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के परिणामस्वरूप 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित 4d संक्रमण श्रेणी के तत्वों की तुलना में काफ़ी बड़ी हो जाती हैं, जिससे उनके रासायनिक गुण पूरी तरह भिन्न हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर को प्रभावित करने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'क्लॉस्ट्रिडियम टेटानी' (Clostridium tetani) के बीजाणुओं द्वारा होता है, और इसके विषैले टॉक्सिन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं जिसके कारण कंकाल पेशियों में गंभीर और दर्दनाक ऐंठन उत्पन्न होती है।
2. 'एड्स' (AIDS) का कारण बनने वाला एचआईवी (HIV) एक रेट्रोवाइरस है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के मुख्य रूप से CD4+ T-लिम्फोसाइट्स को संक्रमित कर नष्ट करता है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अत्यधिक क्षीण हो जाती है।
3. 'मलेरिया' परजीवी का जीवन चक्र केवल मादा एनोफ़ेलीज मच्छर के शरीर के भीतर ही पूर्ण होता है, और मनुष्य में इसका संक्रमण तब होता है जब मच्छर द्वारा स्वस्थ व्यक्ति को काटा जाता है ताकि परजीवी सीधे रक्त में प्रवेश कर सकें।
4. 'क्षय रोग' (Tuberculosis) एक वायुजनित जीवाणु संक्रमण है जो 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' के कारण होता है, और इसके उपचार के लिए 'डॉट्ज़' (DOTS) प्रणाली के अंतर्गत एंटीबायोटिक औषधियों का एक निश्चित पाठ्यक्रम चलाया जाता है।
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और सर्किट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धात्विक चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) उसके तापमान पर निर्भर करता है, और शुद्ध धातुओं के लिए तापमान में वृद्धि होने पर उनकी प्रतिरोधकता रैखिक रूप से बढ़ती है।
2. जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो संयोजन का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोधक के मान से भी कम होता है।
3. किर्चऑफ़ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद विद्युत परिपथ (Loop) में कुल विभवांतरों और प्रेरित विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
4. किसी विद्युत सेल का आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance) उसके टर्मिनलों के बीच के विभवांतर को बढ़ाने का कार्य करता है, चाहे सेल से कोई भी विद्युत धारा प्रवाहित हो रही हो।
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की प्रकृति तथा ध्वनि तरंगों के संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं, जिसके कारण माध्यम में संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के क्षेत्र बनते हैं, और ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में उत्पन्न की जा सकती हैं।
2. प्रकाश तरंगें विद्युत चुंबकीय तरंगें होने के कारण अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं, और इन्हें ध्रुवित (Polarized) किया जा सकता है, जबकि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होने के कारण ध्रुवण की परिघटना प्रदर्शित नहीं करती हैं।
3. जब ध्वनि तरंगें किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो उनकी चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं, लेकिन तरंग की आवृत्ति (Frequency) माध्यम परिवर्तन से अपरिवर्तित रहती है क्योंकि आवृत्ति स्रोत की विशेषता है।
4. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता गुणांक और घनत्व पर निर्भर करती है, जिसके कारण नम हवा का घनत्व शुष्क हवा के घनत्व से अधिक होने के कारण नम हवा में ध्वनि की चाल शुष्क हवा की तुलना में कम हो जाती है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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