General Science
Asked 9 hours ago · Viewed 0 times
गुरुत्वाकर्षण और उपग्रहों की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पृथ्वी की सतह के समीप परिक्रमण कर रहे किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed) का मान केवल पृथ्वी के द्रव्यमान और उसकी त्रिज्या पर निर्भर करता है, और यह उपग्रह के अपने द्रव्यमान से पूर्णतः स्वतंत्र होता है।
- 2. केप्लर के ग्रहों की गति के तृतीय नियम (परिक्रमण काल का नियम) के अनुसार, किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी सूर्य से दीर्घवृत्ताकार कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष (Semi-major axis) के घन के सीधे समानुपाती होता है।
- 3. यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान कोणीय चाल से अचानक अपनी अक्ष पर घूमना बंद कर दें (शून्य कोणीय वेग), तो ध्रुवों को छोड़कर पृथ्वी की सतह पर स्थित सभी वस्तुओं के भार में आभासी वृद्धि हो जाएगी, और विषुवत रेखा पर भार में अधिकतम कमी दर्ज की जाएगी।
- 4. किसी पिंड का गुरुत्वीय त्वरण ($g$) पृथ्वी की सतह से गहराई में जाने पर और पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर जाने पर दोनों ही स्थितियों में घटता है, बशर्ते पृथ्वी को एकसमान घनत्व का ठोस गोला माना जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि पृथ्वी के निकट किसी उपग्रह की कक्षीय चाल का सूत्र $v = \sqrt{GM/R}$ होता है, जो उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। कथन 2 सही है, जो केप्लर के नियमों के अनुसार $T^2 \propto r^3$ को संतुष्ट करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि पृथ्वी के रुकने पर विषुवत रेखा पर अपकेन्द्रीय बल शून्य हो जाएगा, जिससे वहाँ का प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण और वस्तु का भार बढ़ जाएगा (घटेगा नहीं)। कथन 4 सही है, क्योंकि गहराई ($g' = g(1 - d/R)$) और ऊँचाई दोनों ही स्थितियों में $g$ का मान कम होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
अगला प्रश्न →
आवर्त सारणी (Periodic Table) और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) और…
Related Questions
→
अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की प्रकृति तथा ध्वनि तरंगों के संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं, जिसके कारण माध्यम में संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) के क्षेत्र बनते हैं, और ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में उत्पन्न की जा सकती हैं।
2. प्रकाश तरंगें विद्युत चुंबकीय तरंगें होने के कारण अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं, और इन्हें ध्रुवित (Polarized) किया जा सकता है, जबकि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होने के कारण ध्रुवण की परिघटना प्रदर्शित नहीं करती हैं।
3. जब ध्वनि तरंगें किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो उनकी चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं, लेकिन तरंग की आवृत्ति (Frequency) माध्यम परिवर्तन से अपरिवर्तित रहती है क्योंकि आवृत्ति स्रोत की विशेषता है।
4. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता गुणांक और घनत्व पर निर्भर करती है, जिसके कारण नम हवा का घनत्व शुष्क हवा के घनत्व से अधिक होने के कारण नम हवा में ध्वनि की चाल शुष्क हवा की तुलना में कम हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत धारा, प्रतिरोध और सर्किट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धात्विक चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) उसके तापमान पर निर्भर करता है, और शुद्ध धातुओं के लिए तापमान में वृद्धि होने पर उनकी प्रतिरोधकता रैखिक रूप से बढ़ती है।
2. जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो संयोजन का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे छोटे व्यक्तिगत प्रतिरोधक के मान से भी कम होता है।
3. किर्चऑफ़ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद विद्युत परिपथ (Loop) में कुल विभवांतरों और प्रेरित विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
4. किसी विद्युत सेल का आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance) उसके टर्मिनलों के बीच के विभवांतर को बढ़ाने का कार्य करता है, चाहे सेल से कोई भी विद्युत धारा प्रवाहित हो रही हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ध्वनि तरंगों और तरंग गति (Wave Motion and Sound) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के घनत्व के वर्गमूल के सीधे समानुपाती होती है, बशर्ते दाब को स्थिर रखा जाए।
2. लाप्लास (Laplace) द्वारा न्यूटन के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, हवा में ध्वनि का संचरण एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि संपीडन और विरलन की घटनाएँ इतनी तीव्र होती हैं कि ऊष्मा का आदान-प्रदान माध्यम के बाहर नहीं हो पाता है।
3. जब कोई ध्वनि स्रोत एक स्थिर श्रोता की ओर ध्वनि की चाल से अधिक चाल (पराध्वनिक गति) से गति करता है, तो हवा में एक बहुत तेज और विनाशकारी दाब विचलन उत्पन्न होता है, जिसे प्रघाती तरंग (Shock Wave) कहा जाता है।
4. किसी माध्यम में ध्वनि की तीव्रता (Intensity) तरंग के आयाम के सीधे समानुपाती होती है, जबकि यह माध्यम के घनत्व और आवृत्ति के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव शरीर को प्रभावित करने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके संचरण के माध्यम और उनके निदान/उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ट्रेकोमा' (Trachoma) एक जीवाणु जनित नेत्र रोग है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' (Chlamydia trachomatis) के संक्रमण के कारण होता है, और इसके दीर्घकालिक प्रभाव से कॉर्निया में क्षति पहुँच सकती है जिससे अंधापन हो सकता है।
2. 'जापानी एन्सेफलाइटिस' (Japanese Encephalitis) एक विषाणु जनित मस्तिष्क का संक्रमण है, जिसका प्राथमिक संवाहक क्यूलैक्स (Culex) प्रजाति का मच्छर है, और यह मुख्य रूप से सूअरों और पक्षियों के माध्यम से प्रसारित होता है।
3. 'रैबीज' (Rabies) एक घातक वायरल बीमारी है जो केवल जंगली कुत्तों के काटने से फैलती है और इस संक्रमण के होने पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को ठीक करने के लिए विशिष्ट एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है।
4. 'सिकल सेल एनीमिया' (Sickle Cell Anemia) एक आनुवंशिक विकार है जो हीमोglobin जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएँ हँसिए के आकार की हो जाती हैं और उनकी ऑक्सीजन वहन क्षमता प्रभावित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.