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History of India
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बहलोल लोदी का मकबरा कहाँ स्थित है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बहलोल लोदी का मकबरा दिल्ली में स्थित है।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना के प्रारंभिक वर्षों और नरम दल-गरम दल के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) के नेता मुख्य रूप से 'ब्रिटिश न्यायप्रियता' में विश्वास रखते थे और उन्होंने संवैधानिक दायरे में रहकर 'प्रार्थना, याचिका और प्रतिनिधिमंडल' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति को अपनाया था, जिसे आलोचकों ने 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' की संज्ञा दी थी।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के निर्णय के बाद उपजे राष्ट्रव्यापी असंतोष के दौरान गरम दल के नेताओं (बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, विपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष) ने इस आंदोलन को केवल स्वदेशी तक सीमित न रखकर इसे 'स्वराज्य' और ब्रिटिश वस्तुओं के पूर्ण बहिष्कार के रूप में अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने की वकालत की।
3. वर्ष 1907 के ऐतिहासिक सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच वैचारिक मतभेद इस बात को लेकर उत्पन्न हुए कि गरम दल के नेता देश के अन्य हिस्सों में स्वदेशी आंदोलन का विस्तार करने के पक्ष में नहीं थे, जबकि नरमपंथी इसका विस्तार पूरे देश में करना चाहते थे।
4. कलकत्ता में वर्ष 1906 में हुए कांग्रेस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में पहली बार 'स्वराज्य' शब्द का आधिकारिक रूप से प्रस्ताव पारित किया गया, जिसने आगे चलकर दोनों दलों के बीच दरार को और चौड़ा कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के वैचारिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक आयोजित कर 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक शुरुआत की गई और 'बायकॉट' (बहिष्कार) प्रस्ताव पास किया गया।
2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय आंदोलन में आत्मशक्ति (आत्मकेंद्रित आत्मनिर्भरता) के विचार को बढ़ावा दिया गया, जिसके तहत तंजौर के राष्ट्रीय कॉलेज, बंगाल नेशनल कॉलेज और विभिन्न राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना की गई तथा शिक्षा के राष्ट्रीयकरण पर जोर दिया गया।
3. स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक दायरे में केवल विदेशी वस्त्रों और वस्तुओं का बहिष्कार ही शामिल नहीं था, बल्कि इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, अदालतों, उपाधियों और सरकारी नौकरियों का पूर्ण बहिष्कार करने का भी प्रस्ताव था, जिस पर नरम दल और गरम दल के नेताओं के बीच कभी कोई मतभेद उत्पन्न नहीं हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गयासुद्दीन तुगलक सुल्तान बनने से पहले कहाँ का गवर्नर था?
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अकबर का मंत्री टोडरमल:
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास, संघ व्यवस्था तथा उनके ऐतिहासिक परिवेश के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के विपरीत, जैन धर्म ने आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किया और प्रारंभिक काल से ही कठोर तपस्या, कायाक्लेश (कायमोग्लान) तथा संलेखना (संथारा) के माध्यम से कर्मों के क्षय और मोक्ष प्राप्ति पर बल दिया, जबकि महात्मा बुद्ध ने मध्यम मार्ग (मझिम पतिपदा) का उपदेश दिया।
2. जैन संघ और बौद्ध संघ दोनों में ही प्रारंभ से वर्ण व्यवस्था का पूर्णतः बहिष्कार किया गया था, जिसके तहत चांडालों और शूद्रों को भी बिना किसी प्रतिबंध के सीधे भिक्षु या भिक्षुणी बनने की अनुमति दी जाती थी, और दोनों ही धर्मों ने वेदों की प्रामाणिकता को और यज्ञीय कर्मकांडों को बिना किसी अपवाद के स्वीकार किया था।
3. बौद्ध धर्म की प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में महाकाश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी, जिसमें बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्त पिटक' और 'विनय पिटक' के रूप में संकलित किया गया, जबकि जैन धर्म की प्रथम जैन सभा पाटिलपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन ग्रंथों के बारह अंगों का संकलन किया गया था।
4. महात्मा बुद्ध ने अपने संघ में महिलाओं के प्रवेश को सहर्ष और तुरंत स्वीकार कर लिया था, जिससे बौद्ध धर्म में प्रारंभ से ही स्त्रियों की संख्या पुरुषों के बराबर हो गई थी, जबकि महावीर स्वामी ने अपने पूरे जीवनकाल में किसी भी महिला को अपने जैन संघ में दीक्षा नहीं दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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