BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
19 views

दिल्ली सल्तनत का वह एकमात्र सुल्तान कौन था जो युद्ध के मैदान में मारा गया?

Detailed Explanation

इब्राहिम लोदी ही युद्ध के मैदान में मरने वाला एकमात्र सुल्तान था।
Share:

Related Questions

1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आरा पर अधिकार करने के पश्चात जब ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर ने जगदीशपुर पर आक्रमण किया, तब बाबू कुंवर सिंह ने मध्य भारत की ओर प्रस्थान किया और बांदा, रीवा तथा लखनऊ में नाना साहब की सेना के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सफल सैन्य अभियान चलाए। 2. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को समाप्त कर दिया और ब्रिटिश सरकार के साथ संधि कर ली थी। 3. अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध एक प्रभावी और लंबी छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) नीति का संचालन किया, तथा जगदीशपुर के जंगलों से एक समानांतर सरकार चलाई। 4. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों ने इस क्षेत्र में अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाईं, जिनमें गांवों को जलाना और विद्रोहियों को सामूहिक रूप से दंडित करना शामिल था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रह्मणों पर "जजिया कर" लगाने वाला प्रथम मुसलमान शासक कौन था? यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के एवज में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मुक्त व्यापार (दस्तक प्रणाली) करने का अधिकार मिल गया था, जिससे कंपनी को स्थानीय व्यापारियों की तुलना में अत्यधिक व्यावसायिक लाभ हुआ। 2. प्लासी के युद्ध (1757) के पश्चात ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के नवाब मीर कासिम के साथ मिलकर 'दस्तक' के दुरुपयोग को पूरी तरह समाप्त कर दिया और भारतीय व्यापारियों पर लगने والے समस्त आंतरिक शुल्कों को भी हमेशा के लिए हटा दिया। 3. बक्सर के युद्ध (1764) में अंग्रेजों की निर्णायक विजय के पश्चात मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिए, जिसके तहत रॉबर्ट क्लाइव ने द्वैध शासन (Dual Government) प्रणाली की शुरुआत की। 4. मीर कासिम ने अपनी स्वतंत्र नीतियों और ब्रिटिश हस्तक्षेप से बचने के उद्देश्य से अपनी राजधानी को मुर्शिदाबाद से हटाकर मुंगेर (मुंगेर) स्थानांतरित किया था, जहाँ उसने यूरोपीय पद्धति पर आधुनिक सैन्य हथियारों का निर्माण करने के लिए कारखाने स्थापित किए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की, किंतु जिन राजनीतिक कैदियों पर हिंसा (Violence) का प्रत्यक्ष आरोप था, उनकी रिहाई को इस समझौते से बाहर रखा गया था। 2. कराची में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1931 के अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, गांधी-इरविन समझौते को पूर्ण समर्थन प्रदान करते हुए पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' (Fundamental Rights and National Economic Programme) से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था। 3. वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, क्योंकि सविनय अवज्ञा आंदोलन के स्थगन के बाद महात्मा गांधी और वायसराय इरविन के मध्य यह लिखित समझौता हो चुका था कि कांग्रेस ही इस सम्मेलन में संपूर्ण भारत की एकमात्र प्रतिनिधि पार्टी होगी। 4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान द्वारा गठित 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) ने अहिंसक संघर्ष का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया, जबकि तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम तक नमक मार्च का नेतृत्व किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और केंद्रीय प्रशासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रणाली' पूरी तरह से वंशानुगत थी, जिसमें मनसबदार का पद उसकी योग्यता के बजाय उसके कुल और पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर स्वतः उसके पुत्र को स्थानांतरित हो जाता था। 2. जहाँगाड़ी व्यवस्था मनसबदारी प्रणाली का ही एक उप-प्रकार थी, जिसके अंतर्गत मनसबदारों को वेतन के भुगतान के लिए प्रत्यक्ष नकद वेतन (नक़द) के स्थान पर राजस्व का अधिकार रखने वाली जागीरें आवंटित की जाती थीं, और वेतन की गणना 'जात' तथा 'सवार' रैंक के आधार पर होती थी। 3. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारी प्रणाली में 'सिंहस्पा' (दो-अस्पा और सिंह-अस्पा) जैसी नई श्रेणियाँ जोड़ी गईं, जिसके तहत बिना जात रैंक बढ़ाए ही सवार सैनिकों की संख्या में वृद्धि करने की अनुमति दी गई थी। 4. औरंगजेब के शासनकाल में दक्कन अभियानों के दौरान जागीरों की भारी कमी (जागीर संकट) उत्पन्न हो गई थी, क्योंकि उपलब्ध जागीरों की संख्या मनसबदारों की वास्तविक मांग से बहुत कम हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.