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History of India
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दिल्ली सल्तनत के पतन का सबसे दूरगामी कारण क्या था?

Detailed Explanation

उत्तराधिकार के निश्चित नियम न होने से हमेशा कलह रहती थी।
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फिरोज शाह तुगलक के पास दासों की संख्या लगभग कितनी थी? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और संस्थागत परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में 'चालीसा' (तुर्कान-ए-चहलगानी) नामक तुर्क गुलाम सरदारों के एक प्रभावशाली दल का गठन किया था, जिसे बाद में बलबन ने अपनी केंद्रीय सत्ता को सुदृढ़ करने और आंतरिक विद्रोहों का दमन करने के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया था। 2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नगद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने (दाग) तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा को सख्ती से लागू किया, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। 3. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में मंगोल आक्रमणों से निपटने और राज्य की सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए सल्तनत की सेना को तीन वर्षों का अग्रिम वेतन नगद रूप में दिया गया था, जिससे शाही राजकोष दिवालिया होने के कगार पर पहुँच गया था। 4. सिकंदर लोदी ने भू-राजस्व के निर्धारण और माप के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन शुरू किया, जिसकी लंबाई 39 अंगुल (लगभग 30 इंच) थी, तथा उसने कृषि और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अनाज पर लगने वाले जकात (चुंगी कर) को समाप्त कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1858) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, तथा नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) और निदेशक कोर्ट (Court of Directors) को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय परिषद को सौंप दिए गए। 2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जो इलाहाबाद में लॉर्ड कैननिंग द्वारा पढ़ी गई) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासत के विलय की नीति (हड़प नीति) को जारी रखेगी और भविष्य में किसी भी भारतीय राजा को पुत्र गोद लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और स्वतंत्रता का वचन देते हुए यह भी प्रावधान किया गया कि बिना किसी भेदभाव के योग्यता के आधार पर भारतीयों को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में बौद्ध धर्म और जैन धर्म की दार्शनिक मान्यताओं, संघ की व्यवस्थाओं तथा उनके प्रसार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के विपरीत, जैन धर्म ने आत्मा (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार किया और मोक्ष प्राप्ति के लिए 'कंटकशोधन' के मार्ग का अनुसरण करते हुए शरीर को अत्यंत कष्ट देने (संलेखना या कायाक्लेश) पर विशेष बल दिया था। 2. बौद्ध संघ की सदस्यता के लिए वर्ण व्यवस्था को अनिवार्य रूप से स्वीकार करना पड़ता था, जबकि जैन संघ में प्रवेश के लिए सभी जातियों और वर्गों के द्वार खुले थे, किंतु महिलाओं को जैन संघ में दीक्षा देने का प्रावधान महावीर स्वामी ने अपने जीवनकाल में वर्जित कर दिया था। 3. बौद्ध धर्म के त्रिरत्न—बुद्ध, धम्म और संघ हैं, जबकि जैन धर्म के त्रिरत्न—सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र हैं, जिन्हें जैन दर्शन में मोक्ष का वास्तविक मार्ग कहा गया है। 4. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और प्रत्येक वस्तु के अनेक पहलू (अनेकांतवाद) होते हैं, जिसे पूर्ण रूप से जानना एक साधारण मनुष्य के लिए संभव नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के परिणाम और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के नियंत्रण में चला गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके स्थान पर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया। 2. गवर्नर-जनरल का पद समाप्त कर उसके स्थान पर 'वायसराय' पद का सृजन किया गया, और लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने, जिन्हें भारत सचिव के माध्यम से ब्रिटिश मंत्रिमंडल के प्रति उत्तरदायी बनाया गया था। 3. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार अब भारतीय रियासतों का अधिग्रहण करने की अपनी नीति को त्याग देगी और भविष्य में किसी भी नए राज्य का विलय नहीं किया जाएगा। 4. इस अधिनियम और घोषणा के पश्चात ब्रिटिश सेना के पुनर्गठन के अंतर्गत भारतीय सैनिकों के अनुपात को कम किया गया और यूरोपीय सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई, साथ ही सेना में जाति, क्षेत्र और संप्रदाय के आधार पर 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत रेजीमेंटों का गठन किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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