MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt Psychology) और कोह्लाक (Wolfgang Köhler) के 'सूझ या अंतर्दृष्टि अधिगम सिद्धांत' (Insight Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अवस्थान्तरण या रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring)'**—जिसे उस मानसिक और संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति किसी समस्या या उलझन के पारंपरिक और रूढ़िबद्ध दृष्टिकोण को त्यागकर परिस्थिति के विभिन्न घटकों और अवयवों के आपसी संबंधों को अचानक एक नए और समग्र परिप्रेक्ष्य में देखता है, जिससे समस्या का समाधान तुरंत और स्पष्ट रूप से प्रकट हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सृजनात्मक चिंतन, अमूर्त अवधारणात्मक स्पष्टता और आकस्मिक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों (जैसे कोहलर, कोफ्का और वर्दाइमर) के अनुसार, 'सूझ या अंतर्दृष्टि अधिगम' में 'रीस्ट्रक्चरिंग' (पुनर्गठन) वह केंद्रीय संज्ञानात्मक प्रक्रिया है जहाँ बालक समस्या के विभिन्न अंगों को अलग-अलग देखने के बजाय उन्हें एक समग्र पैटर्न या Gestalt के रूप में देखता है। जब छात्र पुरानी मान्यताओं को छोड़कर समस्या के तत्वों को नए सिरे से व्यवस्थित करता है, तो उसे अचानक समाधान की प्राप्ति होती है, जिसे 'आहा! अनुभव' कहा जाता है। यह यांत्रिक रटने या केवल प्रयास-और-त्रुटि पर आधारित न होकर उच्च-स्तरीय सूझबूझ और तार्किक पुनर्गठन पर आधारित होता है।
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