MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)**—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बच्चा किसी वस्तु, समस्या या घटना के केवल एक ही पहलू, आयाम या दृश्य पर ध्यान केंद्रित करने (Centration) के बजाय उसके एक साथ कई पहलुओं और आयामों को ध्यान में रखते हुए समग्र रूप से विचार करने में सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी तार्किक चिंतन, संज्ञानात्मक लचीलेपन और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) वह महत्वपूर्ण संज्ञानात्मक क्षमता है जो बच्चों को किसी स्थिति के एक से अधिक पहलुओं पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देती है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) के बच्चों में 'केंद्रीयकरण' (Centration) की प्रवृत्ति पाई जाती है, जिसके कारण वे किसी वस्तु या घटना के केवल एक ही विशिष्ट और अत्यधिक स्पष्ट पहलू (जैसे बर्तन की केवल लंबाई या चौड़ाई) पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और अन्य आयामों की उपेक्षा करते हैं। जब बच्चा मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में प्रवेश करता है, तो उसके भीतर 'विकेंद्रीकरण' का विकास होता है, जिससे वह तार्किक रूप से यह समझ पाता है कि किसी समस्या या वस्तु के कई आयाम एक साथ जुड़े हो सकते हैं। यही क्षमता 'संरक्षण' (Conservation) और श्रेणीबद्ध वर्गीकरण के विकास का आधार बनती है। अतः विकल्प (c) इस मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय के वैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे अधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है।
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