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History of India
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लोदी सुल्तानों ने अपने प्रशासन में किस भाषा को राजभाषा के रूप में प्रोत्साहित किया?

Detailed Explanation

फारसी लोदी काल की भी प्रशासनिक भाषा थी।
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भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों और उनके दार्शनिक तथा सामाजिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत दोनों ब्रह्म का ही अंश हैं, किंतु वे ब्रह्म से पूर्णतः भिन्न नहीं बल्कि विशिष्ट रूप से जुड़े हुए हैं। 2. मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' (Dualism) का सिद्धांत दिया, जिसके अंतर्गत ईश्वर (विष्णु) और जीवात्मा को दो पूर्णतः स्वतंत्र और भिन्न वास्तविकताएं माना गया है। 3. वल्लभाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'शुद्धैद्वैतवाद' के अनुसार संसार माया का परिणाम नहीं है, बल्कि यह ब्रह्म का ही वास्तविक और शुद्ध रूप है, और उनकी भक्ति परंपरा को 'पुष्टिमार्ग' कहा जाता है। 4. कबीर और गुरु नानक ने निर्गुण भक्ति पर जोर दिया और जाति-प्रथा, मूर्तिपूजा तथा ब्राह्मणवादी कर्मकांडों का पुरजोर विरोध किया, किंतु उन्होंने समाज सुधार के लिए मुस्लिम शासकों और काजियों के धार्मिक अत्याचारों का समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं को यह अधिकार दिया गया था कि वे अपने-अपने प्रांतों के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग-अलग बैठकें आयोजित कर इस बात का निर्णय लें कि क्या उन प्रांतों का विभाजन किया जाना चाहिए। 2. ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक (Indian Independence Bill) जुलाई 1947 में प्रस्तुत किया गया था, जिसे बिना किसी संशोधन के पारित कर दिया गया और 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश सम्राट की स्वीकृति मिलने के बाद यह 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' बन गया। 3. माउंटबेटन योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) का आयोजन किया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व वाले 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने सक्रिय रूप से भाग लेकर पाकिस्तान में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया था। 4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग 'सीमा आयोगों' (Boundary Commissions) का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक आयोग में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के दो-दो प्रतिनिधि शामिल थे, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से सीमा रेखा खींची जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन की पृष्ठभूमि में वर्ष 1947 में प्रस्तुत माउंटबेटन योजना (3 जून योजना) तथा उससे संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के विधायक अलग-अलग बैठक कर यह निर्णय लेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाना चाहिए या नहीं। 2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के साथ मिलने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का स्पष्ट प्रावधान इस योजना में किया गया था। 3. भारत और पाकिस्तान के बीच परिसंपत्तियों, दायित्वों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) को 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही गतिविधियों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने पर, अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंद) घोषित किया गया, लेकिन विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य और प्रशासनिक शक्ति 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के पास थी। 2. बरेली से दिल्ली पहुँचे जनरल बख्त खान ने विद्रोहियों के सैन्य नेतृत्व को संभाला और सम्राट के नाम पर शासन चलाने के लिए एक प्रशासनिक परिषद का गठन किया, किंतु विभिन्न रेजीमेंटों के बीच आपसी फूट और अनुशासनहीनता के कारण इस केंद्रीय नेतृत्व की प्रभावशीलता गंभीर रूप से बाधित हुई। 3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के बाद, ब्रिटिश अधिकारी मेजर विलियम हडसन ने सम्राट के पुत्रों और पोते को हुमायूं के मकबरे के पास गिरफ्तार कर गोली मार दी थी, जबकि बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, जिससे जमींदार भूमि के वास्तविक स्वामी बन गए और यदि वे निर्धारित तिथि तक सूर्यास्त से पहले कर नहीं चुका पाते थे, तो उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी (सूर्यास्त कानून)। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता था, जिसमें व्यक्तिगत किसानों को भूमि का स्वामित्व दिया गया और लगान की दरें पूरी तरह स्थायी थीं, जिन्हें कभी बढ़ाया नहीं गया। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके पूरे गाँव या 'महाल' (गाँवों के समूह) के आधार पर किया जाता था, और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ग्राम के मुखिया या लंबरदार को सौंपी जाती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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