BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
2 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभाویता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्तिगत विश्वास या मनोवैज्ञानिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और वांछিত परिणाम प्राप्त करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य-निर्धारण, दृढ़ता, आंतरिक अभिप्रेरण और शैक्षणिक निष्पादन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत में 'आत्म-प्रभाविता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय संप्रत्यय है जो किसी व्यक्ति की उस क्षमता में विश्वास को दर्शाता है जिसके द्वारा वह विशिष्ट कार्यों को पूरा कर सकता है। विकल्प (C) वैज्ञानिक दृष्टि से सबसे अधिक प्रामाणिक है क्योंकि उच्च आत्म-प्रभाविता वाले छात्र चुनौतियों से भागने के बजाय उनका सामना करते हैं, असफलताओं को दूर करने के लिए अधिक प्रयास करते हैं और अपनी संज्ञानात्मक एवं अधिज्ञानात्मक रणनीतियों का प्रभावी उपयोग करते हैं। अन्य विकल्प मनोवैज्ञानिक रूप से गलत और भ्रामक हैं।
Share:

Related Questions

→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवधारणा—**'करके सीखना' (Learning by Doing)** और **'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking)**—जिसके तहत शिक्षा को केवल भविष्य के जीवन की तैयारी न मानकर स्वयं जीवन का एक वर्तमान अनुभव माना जाता है, तथा शिक्षार्थी अपनी सक्रिय सहभागिता, वास्तविक जीवन की समस्याओं के अन्वेषण और वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास, आलोचनात्मक समस्या-समाधान और अनुभवात्मक ज्ञान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा का पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकանում (Self-Actualization)'**—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक और विकासात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति अपनी पूर्ण क्षमताओं, रचनात्मक संभावनाओं और आंतरिक प्रतिभाओं का पूरी तरह से विकास कर लेता है और अपनी सीमाओं से परे जाकर अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, सर्वांगीण विकास और रचनात्मकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'विकेन्द्रण' (Decentration) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा किसी वस्तु या स्थिति के केवल एक ही पहलू पर ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण / Centration) की अपनी पूर्व प्रवृत्ति से ऊपर उठकर उसके एकाधिक आयामों, जैसे कि लंबाई, चौड़ाई और आयतन को एक साथ देखने और तार्किक रूप से विचार करने में सक्षम हो जाता है (जो कि मुख्य रूप से 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' / Concrete Operational Stage की एक प्रमुख विशेषता है)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण, और बहु-आयामी चिंतन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम आयोजक' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नवीन, जटिल और विस्तृत विषयवस्तु को प्रस्तुत करने से ठीक पहले एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त शिक्षण सामग्री या रूपरेखा प्रदान की जाती है, जो शिक्षार्थी के संज्ञानात्मक ढांचे में पहले से मौजूद पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नवीन सूचनाओं को जोड़ने या 'एन्करिंग' (Anchoring) करने का कार्य करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक संगठन, दीर्घकालिक स्मृति और संज्ञानात्मक संरचना के वैज्ञानिक सुदृढ़ीकरण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अहंता पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion - किशोरावस्था) की अवस्था के दौरान प्रकट होने वाली 'मनोसामाजिक संकट' (Psychosocial Crisis) की अवधारणा—जिसके तहत किशोर बालक अपने आत्म-मूल्यों, विश्वासों, भविष्य के करियर और लिंग-भूमिका को लेकर गहन आत्म-चिंतन करता है और यदि वह एक सुसंगत पहचान विकसित करने में विफल रहता है, तो उसे गंभीर भूमिका संभ्रम या पहचान संकट का सामना करना पड़ता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत संवीक्षा, स्व-संकल्पना (Self-Concept) और मनोवैज्ञानिक समायोजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.