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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्व-प्रभाविता या सेल्फ-एफ़िकेसी' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्तिगत विश्वास या आत्म-आकलन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह मानता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति में अपेक्षित प्रदर्शन करने, कठिनाइयों का सामना करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्यों और रणनीतियों को सफलतापूर्वक निष्पादित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक अभिप्रेरणा, लक्ष्य-निर्धारण और शैक्षणिक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम (तथा सामाजिक-संज्ञानात्मक) सिद्धांत में 'स्व-प्रभाविता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय अवधारणा है। इसका तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता में विश्वास से है जिसके द्वारा वह किसी विशिष्ट परिस्थिति में सफलताપूर्वक कार्य कर सकता है। उच्च स्व-प्रभाविता वाले छात्र कठिन लक्ष्यों का चयन करते हैं, असफलताओं से हताश होने के बजाय अपनी रणनीतियों में सुधार करते हैं और अधिक लचीलापन (Resilience) प्रदर्शित करते हैं। विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक अवधारणा के शैक्षणिक निहितार्थ और वैज्ञानिक सत्य को सटीक रूप से व्यक्त करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सिद्धांत' (Conditions of Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)**—जिसे उस सर्वोच्च बौद्धिक स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करते हुए एक नई, जटिल और अनसुलझी परिस्थिति में तार्किक परिकल्पनाओं का निर्माण करके और उनका परीक्षण कर के एक मौलिक समाधान या निष्कर्ष तक पहुँचता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण (Higher-Order Cognitive Processing), सृजनात्मक चिंतन (Creative Thinking) और स्वतंत्र अनुप्रयोग के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति में प्रकृति की विभिन्न प्रजातियों, वनस्पतियों, जीवों, मौसम के पैटर्न और पारिस्थितिक तंत्र के सूक्ष्म अंतरों को पहचानने, वर्गीकृत करने और उनके साथ सफलतापूर्वक बातचीत करने की उच्च क्षमता पाई जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुभवात्मक अधिगम, पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण और व्यावहारिक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी अनुक्रिया के पश्चात यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम (Reward/Pleasure) प्राप्त होते हैं, तो उस उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) बंध की मजबूती या सहचर शक्ति बढ़ जाती है, तथा यदि असंतोषजनक या कष्टप्रद परिणाम प्राप्त होते हैं, तो वह बंध कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पुनर्बलन, आदत निर्माण और सार्थक अधिगम पथ के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास या सोशल कांट्रैक्ट एंड इंडिविजुअल राइट्स ओरिएंटेशन' (Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-conventional Morality) के अंतर्गत उस उन्नत नैतिक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति कानूनों और नियमों को किसी कठोर, अपरिवर्तनीय या निरपेक्ष सत्य के रूप में देखने के बजाय एक लचीले सामाजिक अनुबंध के रूप में देखता है, जो बहुमत की सहमति और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक मूल्यों, न्यायबोध और आलोचनात्मक तार्किकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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