MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और निर्देशनात्मक सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development and Instruction) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्पाइरल पाठ्यक्रम या चक्राकार पाठ्यचर्या' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस शैक्षणिक दृष्टिकोण के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी विषय या अवधारणा को प्राथमिक स्तर पर अत्यंत सरल, सहज और संवेदी-क्रियात्मक (Enactive) रूप में विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है और जैसे-जैसे छात्र की आयु, परिपक्वता और संज्ञानात्मक स्तर बढ़ता है, उसी विषय को अधिक जटिल, प्रतीकात्मक (Symbolic) और उन्नत स्तर पर बार-बार (चक्राकार रूप में) गहराई से पढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के क्रमिक ज्ञान-निर्माण, पूर्वज्ञान के पुनरुत्पादन और दीर्घकालिक स्मृति में तार्किक एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) का 'स्पाइरल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum) इस मूल विचार पर आधारित है कि किसी भी विषय को किसी भी विकासात्मक स्तर पर किसी भी बच्चे को बौद्ध रूप से ईमानदार तरीके से प्रभावी ढंग से सिखाया जा सकता है। इसका अर्थ है कि एक ही विषय को बार-बार (चक्राकार रूप में) अधिक जटिलता और गहराई के साथ पढ़ाया जाता है। विकल्प 'b' इस मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रक्रिया की सबसे सटीक व्याख्या करता है, क्योंकि यह बालक के बढ़ते संज्ञानात्मक स्तर के अनुरूप पूर्वज्ञान के पुनरुत्पादन और क्रमिक ज्ञान-निर्माण (Scaffolding of Knowledge) को रेखांकित करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवादी सिद्धांत' (Connectionism Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय नियम—**'प्रभाव का नियम या संतोष का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी क्रिया या अनुक्रिया (Response) के परिणाम यदि संतोषजनक या सुखद होते हैं, तो उस उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया के बीच का बंधन (S-R Bond) मजबूत हो जाता है, और यदि परिणाम कष्टदायक या असंतोषजनक होते हैं, तो वह बंधन कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) और संतोषजनक अधिगम अनुभवों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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