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History of India
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विजयनगर साम्राज्य का प्रथम राजवंश कौन सा था?

Detailed Explanation

हरिहर और बुक्का संगम वंश के थे।
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गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का छठा भाग (षडभाग) से लेकर एक-चौथाई भाग तक होती थी, जिसे 'उद्रंग' और 'उपरिकर' जैसे विभिन्न करों के माध्यम से वसूला जाता था, जहाँ 'उपरिकर' संभवतः स्थायी कृषकों पर लगाया जाने वाला एक अतिरिक्त कर था। 2. इस काल में राजाओं और प्रशासनिक अधिकारियों को नगद वेतन देने की प्रथा लगभग समाप्त हो गई थी, जिसके स्थान पर धार्मिक एवं प्रशासनिक सेवाओं के बदले बड़े पैमाने पर कर-मुक्त भूमि अनुदान (अग्रहार) देने की प्रथा शुरू हुई, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े। 3. गुप्त साम्राज्य में भूमि की खरीद-फरोख्त और दान से संबंधित प्रशासनिक कार्यों का विवरण देने के लिए 'पुण्ड्रवर्धन भुक्ति' (वर्तमान बंगाल) से प्राप्त दामोदरपुर और बैग्राम ताम्रपत्र अभिलेख अत्यंत महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हैं। 4. गुप्त काल की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनद्र' (दीनार) कहा जाता था, जो मुख्य रूप से व्यापारिक विनिमय और लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बहुतायत से प्रयोग होते थे, तथा स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद गुप्त सिक्कों में सोने की शुद्धता में निरंतर वृद्धि देखी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र, राजस्व संरचना और सैन्य संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक केंद्रीय मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और यह कोई आधुनिक अर्थों में मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर विभिन्न प्रशासनिक विभागों के परामर्शदाताओं का एक समूह था, जहाँ 'पंडितराव' धार्मिक मामलों और दादानुसार दान-पुण्य का प्रभारी था। 2. शिवाजी ने अपने राज्य में जागीरदारी प्रथा को कड़ाई से हतोत्साहित किया और सैन्य अधिकारियों व सैनिकों को भूमि अनुदान (जागीर) देने के बजाय सीधे नगद वेतन देने की नीति को अपनाया, हालांकि कुछ विशेष मामलों में राजस्व संग्रह के अधिकार दिए गए थे जिन्हें बाद में पेशवा काल में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। 3. मराठा सेना में घुड़सवार सेना के दो प्रमुख वर्ग थे—'पागा' और 'सिलाहदार'। पागा घुड़सवार वे सैनिक थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र सीधे उपलब्ध कराए जाते थे और वे राज्य के पूर्ण नियंत्रण में होते थे, जबकि सिलाहदार सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर सेना में शामिल होते थे। 4. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर द्वारा डेक्कन के सुल्तानों के अधीन विकसित भू-राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश और उर्वरता के आकलन के बाद प्रारंभिक उपज का दो-तिहाई (66%) हिस्सा राज्य के कर के रूप में अनिवार्य रूप से वसूला जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसकी अंतर्निहित कमजोरियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोही ताकतों के पास ब्रिटिश साम्राज्य के पतन के उपरांत एक वैकल्पिक अखिल भारतीय राजनीतिक ढांचा या भविष्य की आधुनिक शासन प्रणाली का कोई सुसंगत एजेंडा या विजन नहीं था। 2. भारत के अधिकांश बड़े और संभ्रांत देसी रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त नए मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का समर्थन करने के बजाय तटस्थता बनाए रखी या ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय सहयोग किया। 3. विद्रोही सेनापतियों के मध्य केंद्रीयकृत कमान और सुदृढ़ सैन्य समन्वय का अभाव था; यद्यपि रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नाना साहब जैसे नेताओं ने अपने स्थानीय क्षेत्रों में वीरता का परिचय दिया, किंतु वे किसी एकीकृत राष्ट्रीय रणनीति के तहत तालमेल बैठाने में असफल रहे। 4. विद्रोहियों के पास पारंपरिक हथियारों की अधिकता थी, जबकि अंग्रेजों के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ और रेलवे) और बेहतर सैन्य संगठन का लाभ था, जिसने उन्हें रणनीतिक बढ़त प्रदान की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में भक्ति और सूफी आंदोलनों की वैचारिक मान्यताओं, उनकी दार्शनिक प्रवृत्तियों तथा सामाजिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाते हुए जाति व्यवस्था और रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया तथा स्थानीय जनभाषा (तमिल) को अपने उपदेशों का माध्यम बनाया, जिससे भक्ति आंदोलन की प्रारंभिक पृष्ठभूमि तैयार हुई। 2. सूफी सिलसिले में 'चिश्ती संप्रदाय' ने भारत में उदारवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थानीय भारतीय संगीत (समां) और योग क्रियाओं को अपनी साधना पद्धति में शामिल किया, जबकि 'सुहरवर्दी संप्रदाय' ने राज्य की राजनीतिक सत्ता से पूर्ण अलगाव बनाए रखा और राजाओं से किसी भी प्रकार के जागीर या उपहार लेने से सख्त परहेज किया। 3. निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत कबीर ने बाह्य आडंबरों, मूर्तिपूजा और जातिगत भेदभाव का पुरजोर खंडन किया, जबकि सगुण भक्ति धारा के प्रवर्तक तुलसीदास ने रामभक्ति के माध्यम से वर्णाश्रम व्यवस्था और सामाजिक मर्यादाओं की पुनर्स्थापना पर बल दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया तथा सरकार के लिए भू-राजस्व की राशि को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया, जिससे कंपनी की आय तो स्थिर हो गई, किंतु कृषि विकास के प्रति जमींदारों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई रैयतवाड़ी व्यवस्था में सरकार और रयत (किसान) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान का निर्धारण भूमि की उपज क्षमता के आधार पर किया जाता था और लगान न चुकाने पर किसानों को भूमि से बेदखल करने का अधिकार सरकार के पास था। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिक के कार्यकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू महालवारी व्यवस्था में व्यक्तिगत किसानों के साथ अलग-अलग कर अनुबंध किया जाता था और पूरे क्षेत्र के राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत किसानों की होती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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