MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रिचर्ड आत्मकेंद्रित और संज्ञानात्मक विकास के अंतर्गत डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठनकर्ता या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस pedagogical पेडागोजी तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नए आने वाले सूचना-समुच्चय को जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त परिचयात्मक सामग्री (Introductory Material) प्रस्तुत करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा निर्माण, अवधारण और सार्थक ज्ञान-संरचना के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से डेविड औसुबेल (David Ausubel) का 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) अत्यधिक महत्वपूर्ण है। औसुबेल के अनुसार, अधिगम तब सबसे अधिक सार्थक होता है जब नया ज्ञान शिक्षार्थी के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से उपस्थित विचारों के साथ तार्किक रूप से जुड़ता है। इसे 'अवकलन या सबसमप्शन' (Subsumption) कहा जाता है। 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer) वे अमूर्त और उच्च-स्तरीय परिचयात्मक सामग्रियां हैं जिन्हें मुख्य पाठ से पहले प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह नए ज्ञान और पूर्व-ज्ञान के बीच 'संज्ञानात्मक सेतु' का काम कर सके। अतः विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक संप्रत्यय के वास्तविक निहितार्थ को सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है।
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