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History of India
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बीजापुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध "गोल गुंबद" (Gumbad) का निर्माण किसने करवाया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मुहम्मद आदिल शाह ने बीजापुर में गोल गुंबद का निर्माण करवाया था।
Related Questions
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मुगलकालीन प्रशासनिक संरचना, भू-राजस्व प्रणालियों और मनसबदारी व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (पूरी) व्यवस्था के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर भूमि का वर्गीकरण कर मालगुजारी निश्चित की गई थी, जिसमें पोलज, परती, चाचर और बंजर भूमियों को शामिल किया गया था।
2. जहाँगाड़ी काल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (Du-aspa Sih-aspa) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत मनसबदारों को बिना अपने जात पद (zat rank) को बढ़ाए ही अपने घुड़सवारों की संख्या को दोगुना करने की अनुमति मिल जाती थी।
3. शाहजहां के शासनकाल में 'मशरूत' (Conditional) पद की व्यवस्था शुरू की गई, जिसके तहत किसी मनसबदार को उसके मूल पद से अधिक संख्या में घोड़े या सैनिक रखने की अनुमति दी जाती थी, और औरंगजेब के काल तक आते-आते खालसा भूमि का क्षेत्रफल कुल साम्राज्य की भूमि का लगभग 50 प्रतिशत तक पहुँच गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में संचालित स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक तथा व्यावहारिक आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, तथा इस आंदोलन के दौरान सर्वप्रथम 'वंदे मातरम्' को आंदोलन का मुख्य राष्ट्रीय गीत बनाया गया।
2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन पर बल देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर अनेक स्वदेशी उद्योगों, बैंकों और बीमा कंपनियों की स्थापना की रूपरेखा तैयार की थी।
3. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे बंबई और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में, तथा सैयद حیدر رضا (सैयद हैदर रज़ा) ने दिल्ली में इस आंदोलन का सक्रिय नेतृत्व किया।
4. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम किसानों और बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी ने राष्ट्रवादी नेताओं का पूर्ण समर्थन किया, तथा पूर्वी बंगाल के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए ब्रिटिश विभाजनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के विभिन्न पहलुओं, उनकी दार्शनिक मान्यताओं तथा सिलसिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के आलवार (वैष्णव संत) और नयनार (शैव संत) संतों ने तमिल भाषा के माध्यम से भक्ति का प्रसार किया और तत्कालीन समाज में प्रचलित जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करते हुए स्त्री संतों (जैसे आंडाल और करैक्कालअम्मैयार) को भी अपने आंदोलन में सम्मिलित किया।
2. चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने योग क्रियाओं और संगीत (समां) को अपने आध्यात्मिक साधना का मुख्य अंग बनाया था, तथा उनके उदार दृष्टिकोण के कारण समकालीन लोगों द्वारा उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर के प्रिय) की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
3. सूफी संतों के शुरुआती दौर में 'बा-शरा' (इस्लामी शरीयत कानूनों के नियमों का पालन करने वाले) और 'बे-शरा' (शरीयत के बंधन से मुक्त, जिन्हें 'कलंदर' या मस्त फकीर भी कहा जाता था) नामक दो प्रमुख धाराएं विकसित हुई थीं, जिनमें चिश्ती और सुहरावर्दी दोनों सिलसिले 'बे-शरा' श्रेणी के अंतर्गत आते थे।
4. भक्ति संत कबीर दास और रामानंद ने निर्गुण और सगुण दोनों धाराओं का समन्वय करते हुए रूढ़िवादी ब्राह्मणवाद और बाह्य आडंबरों (जैसे मूर्तिपूजा और तीर्थयात्रा) का खंडन किया, तथा कबीर के उपदेश उनके शिष्यों द्वारा 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित किए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में पेशवा नाना साहब, उनके विश्वस्त सेनापति तात्या टोपे और मुख्य कूटनीतिक सलाहकार अजीमुल्ला खां द्वारा संचालित गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने बिठूर को अपना मुख्यालय बनाकर कानपुर में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी और स्वयं को पेशवा बाजीराव द्वितीय का उत्तराधिकारी घोषित करते हुए पेशवा की पदवी धारण की।
2. अजीमुल्ला खां, जो पेशे से एक वकील और कूटनीतिज्ञ थे, ने नाना साहब की ओर से लंदन जाकर ब्रिटिश सरकार के समक्ष पेशवा की पेंशन का मुद्दा उठाया था और बाद में विद्रोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने का प्रयास किया था।
3. तात्या टोपे ने कानपुर में नाना साहब की सेना के पराजित होने के बाद कालपी और ग्वालियर की ओर कूच किया तथा रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध एक अत्यंत प्रभावी और आक्रामक सैन्य अभियान का संचालन किया।
4. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के उपरांत घटित 'सतीचौरा घाट नरसंहार' की पूरी योजना और उसके प्रत्यक्ष निष्पादन का तात्कालिक आदेश नाना साहब द्वारा स्वयं व्यक्तिगत रूप से दिया गया था, जिसकी पुष्टि समकालीन ब्रिटिश दस्तावेजों से होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष तथा बेगम हजरत महल एवं मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापतियों को अपनी गुरिल्ला युद्ध शैली से कड़ी चुनौती दी।
3. लखनऊ की अंतिम रक्षा और ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित करने के दौरान सर कॉलिन कैंपबेल और सर जेम्स आउट्राम ने मुख्य भूमिका निभाई, तथा बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और पेंशन स्वीकार कर ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने अत्यधिक इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के राजा के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया तथा युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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