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History of India
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विजयनगर साम्राज्य में वह भूमि जो ब्राह्मणों को सामूहिक रूप से दान दी जाती थी, क्या कहलाती थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ब्राह्मणों को दान दी गई कर-मुक्त भूमि को ब्रह्मदेय या चतुर्वेदीमंगलम कहा जाता था।
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बाजीराव प्रथम ने 1739 ई. में पुर्तगालियों से कौन से दो महत्वपूर्ण क्षेत्र छीन लिए थे?
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1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित इतिहासकारों तथा उनके प्रसिद्ध कथनों एवं मतों पर विचार कीजिए:
1. बेंजामिन डिजराइल ने ब्रिटिश संसद में दिए अपने भाषण में 1857 के विद्रोह को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) मानने से इनकार करते हुए इसे एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) की संज्ञा दी थी।
2. इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजूमदार ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द सिपाही म्यूटिनी एंड द रिवोल्ट ऑफ़ 1857' में यह निष्कर्ष दिया था कि तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो पहला, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।
3. वी.डी. सावरकर ने अपनी ऐतिहासिक कृति 'द इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित और सुनियंत्रित प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में चित्रित किया था।
4. सर जॉन सीले और लॉयर्स ने 1857 के विद्रोह को एक पूर्णतः देशभक्तिपूर्ण राष्ट्रीय आंदोलन बताते हुए इसे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीयों का सुनियोजित स्वतंत्रता संघर्ष माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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हम्पी का प्रसिद्ध "पत्थर का रथ" (Stone Chariot) किस मंदिर परिसर का हिस्सा है?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक विकास और संस्थागत प्रसार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. देवेंद्रनाथ टैगोर द्वारा वर्ष 1839 में स्थापित 'तत्वबोधिनी सभा' का मुख्य उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रचार करना और ब्रह्म समाज के वैचारिक आधार को अधिक सुदृढ़ करना था, जिसने बाद में ब्रह्म समाज के साथ विलय कर लिया।
2. गोपाल हरि देशमुख (जिन्हें 'लोकहितवादी' कहा जाता है) ने शतपत्रे (Lokahitawadinchi Shatpatre) के माध्यम से पारंपरिक रूढ़ियों, जाति भेद और धार्मिक पाखंडों पर तीव्र प्रहार करते हुए सामाजिक समानता और तार्किकता पर बल दिया।
3. मद्रास प्रेसीडेंसी में समाज सुधार के क्षेत्र में कार्य करते हुए वीरेसलिंगम पंतुलु ने विधवा पुनर्विवाह, कन्या भ्रूण हत्या के विरोध और बाल विवाह के उन्मूलन के लिए कड़ा संघर्ष किया तथा दक्षिण भारत में 'प्रार्थना समाज' की शाखा का विस्तार किया।
4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक पुनरुत्थान था और इसने सामाजिक सेवा, शिक्षा प्रसार तथा पाश्चात्य भौतिकवाद के प्रभाव को पूरी तरह से नकारने की नीति अपनाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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