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History of India
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फतेहपुर सीकरी में स्थित "पंचमहल" की वास्तुकला किस धर्म के विहारों से प्रभावित है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह बौद्ध विहारों की शैली पर आधारित है।
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगरीय योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर सामान्यतः दो भागों में विभाजित थे — पश्चिमी भाग जो ऊँचा होता था (जिसे 'दुर्ग' या 'सिटाडेल' कहा जाता था और जहाँ संभवतः शासक वर्ग या विशिष्ट लोग निवास करते थे) तथा पूर्वी भाग जो बड़ा और निचला शहर था (जहाँ सामान्य जनता निवास करती थी), किंतु धौलाविरा इसका एक अपवाद है जो त्रि-स्तरीय (तीन भागों) विभाजित था।
2. सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों (Seals) पर सर्वाधिक अंकन एकशृंगी पशु (Unicorn) का मिलता है, और इसके अतिरिक्त पशुपति शिव (आद्य-शिव) का अंकन मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक प्रसिद्ध मुहर पर मिलता है, जिसके चारों ओर बाघ, हाथी, गेंडा और भैंसा तथा पैरों के पास दो हिरण विराजमान हैं।
3. लोथल और सुतकागडोर हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह (Tidal Ports) थे, जहाँ से मेसोपोटामिया और फारस की खाड़ी के साथ समुद्री व्यापार संचालित होता था, और लोथल से प्राप्त 'गोदीबाड़ा' (Dockyard) विश्व का ज्ञात सबसे प्राचीन कृत्रिम बंदरगाह साक्ष्य माना जाता है।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे के अत्यधिक उन्नत ज्ञान से भली-भांति परिचित थे और उन्होंने अपने नगरों की सुरक्षा दीवारों एवं शस्त्रों के निर्माण में लोहे के हथियारों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया था, जिसके कारण इस सभ्यता को 'लौह युगीन सभ्यता' कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश प्रांतीय शासक और सामंत अपने खोए हुए अधिकारों या पेंशन की पुनः प्राप्ति के लिए लड़ रहे थे, जिसके कारण उनमें अखिल भारतीय स्तर की राजनीतिक दृष्टि और एक साझा प्रशासनिक विजन का पूर्ण अभाव था।
2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ) और तीव्र परिवहन (रेलवे) की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि भारतीय विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीय समन्वय था और न ही वे एक सामंजस्यपूर्ण सैन्य रणनीति के तहत एकजुट होकर लड़ सके।
3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों और शिक्षित मध्यम वर्ग ने विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया तथा अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर खड़े हो गए, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य को शुरुआती हफ्तों में ही भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट घोषित जरूर किया गया था, किंतु उनकी वृद्धावस्था, अनिच्छा और सैन्य नेतृत्व क्षमता की कमी के कारण विद्रोह को कोई प्रभावी केंद्रीय और दिशा-निर्देशन नहीं मिल सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "परगना" का प्रमुख:
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औरंगजेब के समय "नुस्खा-ए-दिलकुशा" की रचना किसने की थी जो दक्षिण भारत के इतिहास का स्रोत है?
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वैदिक काल और उत्तर-वैदिक काल के सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में समाज मूलतः कबीलाई और समतावादी था, जहाँ वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर न होकर कर्म (व्यवसाय) पर आधारित थी और स्त्रियों को उपनयन संस्कार तथा सभा-समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने का अधिकार प्राप्त था।
2. उत्तर-वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (कृषि उपकरणों और हथियारों में) ने अर्थव्यवस्था में कृषि को प्रधानता दी, जिससे कबीलाई समाज का स्थान क्षेत्रीय राज्यों (जनपदों) ने ले लिया और गोत्र व्यवस्था सामाजिक रूप से स्थापित हुई।
3. ऋग्वैदिक काल के प्रमुख देवता इंद्र और अग्नि थे, जिन्हें यज्ञों के माध्यम से आहुतियाँ दी जाती थीं, किंतु उत्तर-वैदिक काल में प्रजापति (सृष्टिकर्ता) सर्वोच्च देवता के रूप में उभरे तथा यज्ञों में जटिलता और पशु-बलि का प्रचलन अत्यधिक बढ़ गया।
4. वैदिक साहित्य में उल्लिखित 'निष्क' और 'शतमान' प्रारंभिक चरण में सोने के माप या आभूषण के रूप में प्रयुक्त होते थे, किंतु उत्तर-वैदिक काल के अंत तक इनका प्रयोग नियमित विनिमय के साधन (मुद्रा के रूप में) होने के अकाट्य प्रमाण मिलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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