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History of India
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अकबर ने काबुल की सूबेदारी अपनी बहन "बख्तुन्निसा बेगम" को किस वर्ष सौंपी थी?

Detailed Explanation

1581 में अकबर ने काबुल का शासन उसे सौंपा।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया, जिससे भारतीय शासकों के भीतर गहरी राजनीतिक असुरक्षा और असंतोष उत्पन्न हुआ। 2. ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने उनके पारंपरिक धर्म और संस्कृति पर सीधा आघात माना। 3. भू-राजस्व की कठोर नीतियों और अंग्रेजों द्वारा पारंपरिक हस्तशिल्प व कुटीर उद्योगों के systematic विनाश के कारण न केवल किसान वर्ग बल्कि पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार भी आर्थिक रूप से तबाह हो गए, जिन्होंने बाद में विद्रोह के दौरान अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। 4. लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेना सेवा भर्ती अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया कि बंगाल सेना के नए रंगरूटों को आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेशों में) भी सेवा देने जाना होगा, जिसे उच्च वर्ण के भारतीय सैनिकों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं (समुद्र पार यात्रा निषेध) के विरुद्ध माना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और शिवाजी के केंद्रीय प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी ने मराठा सेना में 'पागा' (राजकीय घुड़सवार सेना) और 'सिलहदार' (अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर आने वाले घुड़सवार) दोनों प्रकार की सेनाओं का गठन किया था, और पागा सैनिकों को अधिक प्रतिष्ठित तथा राज्य द्वारा सुसज्जित माना जाता था। 2. 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में 'सुमन्त' (या दबीर) का मुख्य कार्य विदेश मामलों और युद्ध-शांति के समय कूटनीतिक संबंधों की देखरेख करना था, जबकि 'वाक्यनवीस' (या मंत्री) का कार्य राजा के दैनिक कार्यों, गुप्तचर विभाग और दरबारी गतिविधियों का अभिलेख रखना था। 3. शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर की राजस्व पद्धति के आधार पर भूमि की पैमाइश की नई इकाई 'काठी' को अनिवार्य बनाया, और पारंपरिक देशमुखों व पाटिल जैसे वंशानुगत राजस्व अधिकारियों को पूरी तरह समाप्त कर उनके स्थान पर सीधे सरकारी कारकुनों की नियुक्ति की। 4. मराठा प्रशासन में किलों (Forts) का रणनीतिक महत्व अत्यधिक था, और प्रत्येक महत्वपूर्ण किले पर सुरक्षा और प्रशासन की दृष्टि से तीन अधिकारी—हवलदार, सबनीस और कारखानीस—संयुक्त रूप से नियुक्त किए जाते थे, जिनमें से एक अधिकारी मराठा जाति का होना अनिवार्य नहीं होता था ताकि आपसी मिलीभगत को रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास तथा उनकी संगीतों (Councils) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध संघ के प्रथम विभाजन के पश्चात महासंगिफ़क संप्रदाय का उदय हुआ, जिसने अनुशासन के नियमों में लचीलापन अपनाने का समर्थन किया, जबकि थेरवादी (स्थविरवाद) रूढ़िवादी परंपरा के पक्षधर रहे। 2. जैन धर्म की प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन वेदों और बारह अंगों का संकलन किया गया, किंतु दिगंबर संप्रदाय ने इन संकलित ग्रंथों को पूरी तरह स्वीकार करने से इंकार कर दिया। 3. बौद्ध धर्म के विपरीत जैन धर्म ने आत्मा (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार किया और मोक्ष प्राप्ति के लिए घोर कायाक्लेश तथा तपस्या को अनिवार्य माना, जबकि बुद्ध ने मध्यम प्रतिपधा (अमज्झिण पतिपदा) पर बल दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती वर्षों में नरम दल (Moderate) और बाद के वर्षों में उभरे गरम दल (Extremist) के वैचारिक दृष्टिकोण, कार्यप्रणाली और राजनीतिक लक्ष्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नरमपंथी नेताओं का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था और वे प्रशासनिक सुधारों के लिए 'प्रेयर, पेटिशन और प्रोटेस्ट' (प्रार्थना, याचिका और विरोध) की त्रिविध पद्धति में विश्वास रखते थे, जबकि गरमपंथी नेताओं ने ब्रिटिश राज के प्रति 'आत्म-निर्भरता' और 'स्वदेशी' के माध्यम से राजनीतिक अधिकारों की मांग पर जोर दिया। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उत्पन्न स्वदेशी आंदोलन के दौरान सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसका मुख्य तात्कालिक कारण गरमपंथियों द्वारा आंदोलन के दायरे को केवल बंगाल तक सीमित रखने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का विरोध करना था। 3. नरमपंथियों का सामाजिक आधार मुख्य रूप से शिक्षित मध्य वर्ग,की वकीलों, डॉक्टरों और बुद्धिजीवियों तक सीमित था, जबकि गरमपंथी नेताओं जैसे बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल ने भारतीय संस्कृति, गणेश उत्सव और शिवाजी महोत्सव के माध्यम से इस आंदोलन को जनसामान्य तक पहुँचाने का प्रयास किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? तालिकोटा के युद्ध में विजयनगर का नेतृत्व किसने किया था?
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