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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत 'लॉरेंस कोहलबर्ग' (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोहलबर्ग ने अपने इस सिद्धांत को प्रतिपादित करने के लिए 'हाइन्ज़ की दुविधा' (Heinz's Dilemma) नामक नैतिक कहानियों का उपयोग करके बालकों और वयस्कों के साक्षात्कारों का विश्लेषण किया था।
  2. 2. 'परंपरागत नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण को 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति समाज के नियमों और कानून का पालन करने को अपना कर्तव्य मानता है।
  3. 3. कोहलबर्ग के सिद्धांत के अनुसार, अंतिम स्तर 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) में व्यक्ति के नैतिक निर्णय पूरी तरह से बाहरी सामाजिक दबाव, पुरस्कार और दंड पर आधारित होते हैं।
  4. 4. कोहलबर्ग के आलोचकों (जैसे कैरल गिलिगन) का यह तर्क था कि इस सिद्धांत में पुरुषों के न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई है और महिलाओं की 'देखभाल और संबंध' (Care and Relationships) की नैतिकता की उपेक्षा की गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक तार्किकता का अध्ययन करने के लिए 'हाइन्ज़ की दुविधा' जैसी कहानियों के माध्यम से बच्चों और वयस्कों का साक्षात्कार लिया था। कथन 2 सही है क्योंकि पारंपरिक स्तर के चौथे चरण (Stage 4) को 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' कहा जाता है, जहाँ सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) बाहरी सामाजिक दबाव या दंड-पुरस्कार पर आधारित नहीं होती, बल्कि यह आंतरिक विवेक, सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों और व्यक्तिगत अधिकारों पर आधारित होती है; बाह्य कारकों पर आधारित नैतिकता 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional Level) की विशेषता है। कथन 4 सही है क्योंकि प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कैरल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत की यह कहकर आलोचना की थी कि इसमें पुरुषोचित 'न्याय' के सिद्धांत को अधिक महत्व दिया गया है जबकि महिलाओं के 'देखभाल और संबंधों' के नैतिक दृष्टिकोण की उपेक्षा की गई है। अत: केवल कथन 1, 2 और 4 सही हैं।
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