BaalVikas
Menu
Child Development
Asked 1 month ago · Viewed 9 times

सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के अंतर्गत 'सुपरइगो' (Super-ego) और 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' (Oedipus Complex) की अंतर्संबंधित अवधारणाओं का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, फ्रायड के अनुसार बालक में नैतिक विकास, अंतःकरण (Conscience) का उदय और लिंग-विशिष्ट पहचान का निर्माण किस अवस्था में और किस मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है?

Detailed Explanation

सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'लैंगिक अवस्था' (Phallic Stage) लगभग 3 से 6 वर्ष की आयु के बीच होती है, जहाँ बालकों में 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' (लड़कों में माता के प्रति आकर्षण और पिता से प्रतिद्वंद्विता) तथा बालिकाओं में 'इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स' की भावना उत्पन्न होती है। इस द्वंद्व का समाधान तब होता है जब बच्चा अपने समलिंगी माता-पिता के साथ तादात्म्य (Identification) स्थापित करता है और उनके नैतिक मूल्यों तथा सामाजिक मानदंडों को अपने भीतर आत्मसात कर लेता है, जिससे व्यक्तित्व के नैतिक घटक यानी 'सुपरइगो' (Super-ego) का पूर्ण विकास होता है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'विशिष्ट आवश्यकता वाले… ← पिछला प्रश्न अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) के संदर्भ में…

Related Questions

→ लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'मचान या पाड़' (Scaffolding) की अवधारणाओं का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि एक शिक्षक किसी जटिल समस्या को हल करने के दौरान छात्र को शुरुआती संकेत, आंशिक समाधान और तार्किक दिशा-निर्देश प्रदान करता है, और जैसे-जैसे छात्र की दक्षता बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे अपनी सहायता को धीरे-धीरे कम करता जाता है, तो यह संपूर्ण शैक्षणिक प्रक्रिया वाइगोत्स्की के सिद्धांत के अनुसार अधिगम और विकास के किस अंतर्निहित संबंध को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करती है? → प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के प्रणेता जॉन डीवी के 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) और 'प्रोजेक्ट मेथड' (Project Method) के दार्शनिक तथा मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस शिक्षा प्रणाली के उस वास्तविक और व्यावहारिक स्वरूप को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है जो पारंपरिक शिक्षक-केंद्रित और पाठ्यपुस्तक-आधारित शिक्षा से पूरी तरह भिन्न है? → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत 'यूनिवर्सल डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के त्रि-आयामी सिद्धांतों—जैसे संलग्नता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रतिनिधित्व के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)—का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प UDL के वास्तविक और व्यावहारिक उद्देश्य को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है? → राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के मुख्य आधार-पत्रों और 'निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009)' की धारा 29 के तहत निर्धारित पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणालियों का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा प्रावधान इन दोनों वैधानिक एवं शैक्षणिक दस्तावेजों के उस केंद्रीय उद्देश्य को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से प्रतिबिंबित करता है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास, भयमुक्त वातावरण और सतत व व्यापक मूल्यांकन (CCE) को अनिवार्य बनाता है? → निम्नलिखित में से कौन सा कथन विकास के 'समीप - दूराभिमुख' सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.