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History of India
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मनसबदारी व्यवस्था का जनक:

Detailed Explanation

अकबर ने यह व्यवस्था शुरू की।
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक आकलन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश इतिहासकार या समकालीन विचारक ने यह मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह न तो राष्ट्रीय था, न ही स्वतंत्रता संग्राम था और न ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था'? वैदिक साहित्य और दर्शन के संदर्भ में 'आरण्यक' और 'उपनिषद' के ऐतिहासिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आरेण्यकों को 'रहस्यमय पुस्तकें' (Mystery Books) भी कहा जाता है, जिनकी रचना मुख्य रूप से वनों में एकांतवास करने वाले मुनियों और तपस्वियों के लिए की गई थी, और ये यज्ञ के कर्मकांडों के भौतिक स्वरूप के स्थान पर उसके दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों पर बल देते हैं। 2. उपनिषदों को 'वेदान्त' (वेदों का अंत या अंतिम भाग) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से कर्मकांडों और बलि-प्रथा का समर्थन करते हैं तथा भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए विभिन्न देवताओं की स्तुति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। 3. भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' मुंडकोपनिषद से लिया गया है, जो आत्मा (आत्मन्) और ब्रह्मांडीय शक्ति (ब्रह्म) की एकता के दार्शनिक सिद्धांत की व्याख्या करता है। 4. वैदिक काल के उत्तरार्ध में रचे गए उपनिषदों में पुनर्जन्म के सिद्धांत और 'कर्म के नियम' (Law of Karma) का सबसे पहले स्पष्ट और व्यवस्थित दार्शनिक उल्लेख मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शंकराचार्य के 'अद्वैत वेदांत' के विपरीत, निम्बार्क ने 'द्वैताद्वैतवाद' (भेदाभेद) के दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव, जगत और ब्रह्म परस्पर भिन्न भी हैं और अभिन्न भी हैं, तथा राधा-कृष्ण की युगल उपासना उनके मार्ग का मुख्य आधार थी। 2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'चिशती सिलसिला' ने भारत में सादगी, संगीत (समा) और उदारता का मार्ग अपनाया, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने राजनीतिक सत्ता से दूरी बनाए रखते हुए 'सुल्तान-उल-मशाइख' की उपाधि धारण की और सल्तनत के कई सुल्तानों के आमंत्रण के बावजूद कभी भी शाही दरबार में कदम नहीं रखा। 3. भक्ति आंदोलन के महान संत चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में 'अचिंत्य भेदाभेद' के सिद्धांत का प्रचार किया और भगवान श्रीकृष्ण की प्रेम-भक्ति (कीर्तन परंपरा) को समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाया, जिसमें जाति और धर्म का कोई भेदभाव नहीं था। 4. सूफी संतों में 'सुह्रवर्दी सिलसिला' के विपरीत चिश्ती संतों ने राजकीय अनुदान, जागीरें और नगद धन स्वीकार करने की सख्त मनाही की थी, किंतु सूहरावर्दी संतों ने राज्य के साथ घनिष्ठ संबंध रखे और उच्च पदों तथा शाही संरक्षण को सहर्ष स्वीकार किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली में 1857 के विद्रोह के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किए जाने के बाद, जफर ने अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह को अपनी नैतिक और प्रतीकात्मक स्वीकृति प्रदान कर दी थी। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य कमान और बागडोर एक प्रशासनिक और सैन्य परिषद (Court of Mutineers) के हाथ में थी, जिसमें जनरल बख्त खान ने प्रमुख भूमिका निभाई थी और जफर की भूमिका मुख्य रूप से एक प्रतीकात्मक सम्राट तक ही सीमित थी। 3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के पश्चात मेजर विलियम हडसन ने हुमायूं के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया, तथा बाद में उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया गया, जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हो गई। 4. बहादुर शाह जफर ने अपने पुत्रों और सेनापतियों के साथ मिलकर ब्रिटिश जनरल जॉन निकोलसन के विरुद्ध कश्मीरी गेट पर व्यक्तिगत रूप से एक शक्तिशाली सैन्य मोर्चे का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को दिल्ली छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? फिरोज शाह तुगलक ने अपनी वसीयत में किसे अपना उत्तराधिकारी चुना था?
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