Child Development
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) के उत्तरार्ध में बच्चों में पाई जाने वाली 'अंतर्ज्ञान अवधि' (Intuitive Thought Substage, लगभग 4 से 7 वर्ष की आयु) की तात्विक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख मनोवैज्ञानिक सीमा इस चरण के बच्चे के चिंतन में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage) की 'अंतर्ज्ञान अवधि' में बच्चों का चिंतन तर्क के बजाय धारणा या अंतर्ज्ञान पर आधारित होता है। इस अवस्था की मुख्य सीमाओं में 'केंद्रीकरण' (Centration - किसी स्थिति के केवल एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करना) और 'प्रतिवर्तनीयता का अभाव' (Lack of Reversibility - मानसिक रूप से प्रक्रिया को उलटने में असमर्थता) शामिल हैं। संरक्षण (Conservation) और श्रेणी समावेशन जैसी क्षमताएं इसके बाद आने वाली मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में विकसित होती हैं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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