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History of India
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जहाँगीर ने न्याय की फरियाद के लिए आगरा के किले में कौन सी प्रसिद्ध जंजीर लगवाई थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जहाँगीर न्याय की जंजीर (जंजीर-ए-अदल) के लिए जाना जाता है।
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मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक विकास, सैन्य सुधारों और धार्मिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा आरंभ की गई 'मनसबदारी प्रथा' मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत स्तर और वेतन को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया संशोधन करते हुए 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो घोड़े और तीन घोड़े) की पदोन्नति व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने जात रैंक को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति मिल गई थी।
3. शाहजहां के शासनकाल में भू-राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत 'दहशाला' प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उसके स्थान पर 'नासक' या 'कंकूट' प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे किसानों पर कर का बोझ कम हो गया और साम्राज्य की आय में भारी वृद्धि हुई।
4. औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के अंतर्गत वर्ष 1679 में पुनः 'जजिया कर' (Jizya Tax) को लागू किया गया, और इसके साथ ही उसने सम्राट के जन्मदिन पर वजन तौलने की पारंपरिक प्रथा 'तुलादान' (Jharokha Darshan और संगीत पर प्रतिबंध के साथ) को भी गैर-इस्लामिक घोषित कर समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान अवध और लखनऊ क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके रणनीतिक प्रतिरोध के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अवध के नवाब वाजिद अली शाह के निष्कासन और ब्रिटिश विलय के उपरांत अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला, तथा ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य संचालन का प्रभावी मार्गदर्शन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अवध और रोहिल्ला क्षेत्र में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया और अंग्रेजों द्वारा उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया गया था।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेनापति कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्रम की संयुक्त सेनाओं द्वारा लखनऊ पर पुनः अधिकार किए जाने के उपरांत आत्मसमर्पण कर दिया और जीवन के अंतिम दिनों तक लखनऊ में ही पेंशन पर रहीं।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने शाहजहांपुर और लखनऊ के संघर्षों में अदम्य साहस का परिचय दिया, और अंततः एक स्थानीय राजा (पवार के राजा जगन्नाथ सिंह) के विश्वासघात के कारण रुआर के निकट उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 3 जून 1947 को घोषित माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन के साथ-साथ पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं को अपने-अपने प्रांतों के विभाजन के प्रश्न पर मतदान करने का अधिकार दिया गया था।
2. ब्रिटिश संसद में पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act 1947) के प्रावधानों के तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए तथा ब्रिटिश क्राउन की सर्वोच्चता और नियंत्रण समाप्त हो गया।
3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल होने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) का आयोजन किया गया था, जिसमें दोनों ही क्षेत्रों की बहुसंख्यक जनता ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था।
4. रेडक्लिफ आयोग (Boundary Commission) द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा निर्धारण का अंतिम पुरस्कार (Award) 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस के जश्न से पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया था ताकि किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव को तुरंत टाला जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक विकास और संस्थागत प्रसार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. देवेंद्रनाथ टैगोर द्वारा वर्ष 1839 में स्थापित 'तत्वबोधिनी सभा' का मुख्य उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रचार करना और ब्रह्म समाज के वैचारिक आधार को अधिक सुदृढ़ करना था, जिसने बाद में ब्रह्म समाज के साथ विलय कर लिया।
2. गोपाल हरि देशमुख (जिन्हें 'लोकहितवादी' कहा जाता है) ने शतपत्रे (Lokahitawadinchi Shatpatre) के माध्यम से पारंपरिक रूढ़ियों, जाति भेद और धार्मिक पाखंडों पर तीव्र प्रहार करते हुए सामाजिक समानता और तार्किकता पर बल दिया।
3. मद्रास प्रेसीडेंसी में समाज सुधार के क्षेत्र में कार्य करते हुए वीरेसलिंगम पंतुलु ने विधवा पुनर्विवाह, कन्या भ्रूण हत्या के विरोध और बाल विवाह के उन्मूलन के लिए कड़ा संघर्ष किया तथा दक्षिण भारत में 'प्रार्थना समाज' की शाखा का विस्तार किया।
4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक पुनरुत्थान था और इसने सामाजिक सेवा, शिक्षा प्रसार तथा पाश्चात्य भौतिकवाद के प्रभाव को पूरी तरह से नकारने की नीति अपनाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की सैन्य व्यवस्था, प्रशासनिक संरचना और राजस्व नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की नियमित अश्वसेना में 'पागा' और 'सिलहदार' दो प्रमुख श्रेणियां थीं; जहाँ 'पागा' के घुड़सवारों को राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे, वहीं 'सिलहदार' सैनिक अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में भाग लेते थे।
2. मराठा प्रशासन में 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद के अंतर्गत 'पंडितराव' धार्मिक मामलों, दान और शिष्टाचार का प्रमुख अधिकारी था, जबकि 'न्यायाधीश' नामक अधिकारी सैन्य मामलों और युद्ध रणनीति का सर्वोच्च मार्गदर्शक होता था।
3. शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर के राजस्व सुधारों को अपनाया था, जिसके तहत भूमि की पैमाइश कर कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत भाग राज्य के हिस्से के रूप में निर्धारित किया गया था, और उन्होंने 'मिरासदारों' (वंशानुगत भू-स्वामियों) के विशेषाधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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