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History of India
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औरंगजेब का राज्याभिषेक दो बार हुआ था, उसने कौन सी उपाधि धारण की थी?

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औरंगजेब ने आलमगीर (विश्व विजेता) की उपाधि ली थी।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज के वैचारिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय ने वर्ष 1814 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य उपनिषदों और वेदांत के एकेश्वरवादी विचारों का प्रचार करना तथा समाज में व्याप्त मूर्तिपूजा, जातिगत कठोरताओं और सती प्रथा जैसी कुरीतियों का बौद्धिक तर्कों के साथ विरोध करना था। 2. वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने हिंदू धर्म की रूढ़िवादिता और बहुदेववाद का खंडन करते हुए इस बात पर बल दिया कि वेदों और उपनिषदों में एक ही निराकार, सर्वव्यापी और परमेश्वर की सत्ता का विधान है, अतः इसमें किसी भी प्रकार की मूर्ति या मंदिर की पूजा के लिए कोई स्थान नहीं था। 3. ब्रह्म समाज ने ईसाई धर्म के नैतिक उपदेशों (विशेषकर 'बाइबल के नैतिक और धार्मिक उपदेश' - The Precepts of Jesus) की सराहना की और उन्हें भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के साथ जोड़ने का प्रयास किया, जिसके कारण स्कॉटिश पादरी अलेक्जेंडर डफ जैसे ईसाई मिशनरियों के साथ उनके वैचारिक मतभेद पूरी तरह समाप्त हो गए थे। 4. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के भीतर हुए वैचारिक मतभेदों और अंतर्विरोधों के कारण वर्ष 1866 में इसका पहला औपचारिक विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वुप देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' का नेतृत्व किया जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' की स्थापना की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1858 के 'भारत सरकार अधिनियम' और ब्रिटिश क्राउन की ऐतिहासिक घोषणा के पश्चात ब्रिटिश नीतियों में हुए परिवर्तनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर भारत के प्रशासन की संपूर्ण शक्ति ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दी गई, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1858) में देशी रियासतों के प्रति अपनाई जाने वाली नीति में परिवर्तन करते हुए ब्रिटिश सरकार ने भविष्य में किसी भी प्रकार के राज्य-विलय (Annexation) और 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) को हमेशा के लिए त्यागने की घोषणा की तथा राजाओं को 'दत्तक पुत्र' (Adopted Son) लेने के अधिकार को मान्यता दी। 3. इस घोषणा में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि सेना में यूरोपीय सैनिकों के अनुपात को कम किया जाएगा और भारतीय सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि की जाएगी ताकि भविष्य में पुनः ऐसे किसी विद्रोह को तुरंत रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में संचालित स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के वैचारिक तथा व्यावहारिक आयामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, तथा इस आंदोलन के दौरान सर्वप्रथम 'वंदे मातरम्' को आंदोलन का मुख्य राष्ट्रीय गीत बनाया गया। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन पर बल देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर अनेक स्वदेशी उद्योगों, बैंकों और बीमा कंपनियों की स्थापना की रूपरेखा तैयार की थी। 3. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे बंबई और पुणे में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में, तथा सैयद حیدر رضا (सैयद हैदर रज़ा) ने दिल्ली में इस आंदोलन का सक्रिय नेतृत्व किया। 4. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम किसानों और बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी ने राष्ट्रवादी नेताओं का पूर्ण समर्थन किया, तथा पूर्वी बंगाल के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए ब्रिटिश विभाजनकारी नीतियों का पुरजोर विरोध किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल में "कनकुत" (Kankut) विधि का अर्थ क्या था? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की सक्रिय भूमिका तथा उनके कूटनीतिक एवं सैन्य प्रबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नाना साहब ने कानपुर में ब्रिटिश छावनी पर अधिकार करने के पश्चात स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में मराठा गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समक्ष कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अंतिम समय तक युद्धरत रहे। 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार, वकील और दार्शनिक मार्गदर्शक थे, ने विद्रोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए तुर्की (ऑटोमन साम्राज्य) और अन्य यूरोपीय देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया था। 3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के बाद नाना साहब की सेना के प्रमुख कमांडर के रूप में न केवल बुंदेलखंड और मध्य भारत के क्षेत्रों को संभाला, बल्कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर के किले पर अधिकार करने में भी निर्णायक भूमिका निभाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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