BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
11 views

किस मुगल शासक ने अपनी जीवनी लिखी?

Detailed Explanation

बाबर और जहाँगीर ने लिखी।
Share:

Related Questions

छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'वज्जी' और 'मल्ल' संघ शासन (गणराज्य) प्रणाली के उदाहरण थे, जबकि अधिकांश अन्य महाजनपद राजतंत्रात्मक व्यवस्था के अंतर्गत आते थे। 2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पांच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण अत्यधिक सुरक्षित थी, और बाद में राजा उदयन (उदयीन) ने गंगा और सोन नदियों के संगम पर स्थित पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया। 3. मगध के उत्थान में हर्यक वंश के राजा बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति अपनाई, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु ने कौशलों और वज्जी संघ को पराजित करने के लिए रथमुसल और महाशिलाकंटक जैसे नवीन सैन्य हथियारों का प्रयोग किया था। 4. महापद्मनंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्र्रान्तक' (क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकराट्' की उपाधि से विभूषित किया गया है, जिसने नंद वंश की स्थापना करके कलिंग पर विजय प्राप्त की थी और मगध की सीमा को दक्षिण भारत तक विस्तारित कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पानीपत का प्रथम युद्ध किसके बीच हुआ था? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सिपाहियों के आगमन और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों ने 11 मई 1857 को दिल्ली पहुंचकर लाल किले पर कब्जा कर लिया और अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान' घोषित कर इस विद्रोह का प्रतीकात्मक नेतृत्व स्वीकार करने के लिए विवश कर दिया था। 2. दिल्ली में वास्तविक सैन्य नेतृत्व और प्रशासन की बागडोर मुख्य रूप से जनरल बख्त खान के नेतृत्व में आई प्रशासनिक एवं सैन्य परिषद के हाथों में थी, जिसने सम्राट के नाम पर शासन चलाया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किया। 3. दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन इस संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई, जबकि कर्नल हडसन ने राजकुमारों की हत्या कर सम्राट को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार किया था। 4. विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने बहादुर शाह जफर पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया और उन्हें मृत्युदंड की सजा देकर दिल्ली की ही एक खुली अदालत में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं। 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में ब्रिटिश खुफिया तंत्र को चकमा देकर देश से पलायन किया और जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और पहली बार जर्मनी में ही भारतीय युद्धबंदियों को संगठित करके 'आज़ाद हिंद फौज' की औपचारिक स्थापना की थी। 3. रास बिहारी बोस ने टोक्यो सम्मेलन में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना की और सिंगापुर में आयोजित सम्मेलन में 'आज़ाद हिंद फौज' का औपचारिक पुनर्गठन कर इसकी कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंपी, जिन्होंने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'अस्थाई आज़ाद सरकार' (आर्ध हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद) की स्थापना की घोषणा की थी। 4. आज़ाद हिंद फौज की 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और महिलाओं की एक रेजिमेंट 'रानी झांसी रेजिमेंट' (जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल ने किया था) ने बर्मा और इम्फाल अभियान के दौरान जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारत के धार्मिक इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, प्रमुख संतों की दार्शनिक मान्यताओं तथा उनके सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों ने जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी वर्चस्व की कठोरता को चुनौती देते हुए अपनी भक्ति रचनाओं का प्रसार संस्कृत के स्थान पर तमिल भाषा में किया, जिससे आम जनमानस तक उनकी पहुँच सुगम हो गई। 2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जाति और लिंग के भेदभाव को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार जाति से), कबीर (जुलाहा), सेना (नाई) और पद्मावती जैसी निचली जातियों व महिलाओं को भी सम्मिलित किया था। 3. सूफी संतों के 'चिश्ती सिलसिले' ने संगीत और समा (कव्वाली) को ईश्वर-प्राप्ति का एक प्रमुख साधन माना, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने तत्कालीन सुल्तानों के दरबार से कड़ाई से दूरी बनाए रखने की नीति का पालन किया और कभी भी शाही अनुदान स्वीकार नहीं किया। 4. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय संरक्षण और शाही अनुदान को स्वीकार करने से परहेज नहीं किया, तथा उनका यह मानना था कि आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधाओं का होना भी ईश्वर की कृपा का प्रतीक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.