त्वरित लिंक्स
MPTET
3 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'करके सीखना या लर्निंग बाय डूइंग' (Learning by Doing)**—जिसे उस व्यावहारिक और सक्रिय शैक्षणिक दृष्टिकोण के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी केवल निष्क्रिय श्रोता न बनकर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, प्रायोगिक गतिविधियों, हस्तपरक अनुभवों (Hands-on Experiences) और सामाजिक समस्याओं के समाधान के माध्यम से ज्ञान का सक्रिय निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और लोकतांत्रिक सामाजिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के पाठ्यक्रम और बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (Child Development and Pedagogy) के दृष्टिकोण से, जॉन डीवी के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) के अंतर्गत 'करके सीखना' (Learning by Doing) का संप्रत्यय रचनावाद (Constructivism) की नींव पर आधारित है। यह सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि बच्चे निष्क्रिय रूप से ज्ञान को ग्रहण नहीं करते, बल्कि वे अपने परिवेश के साथ अंतर्क्रिया करके, हस्तपरक अनुभवों (Hands-on Experiences) और प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से ज्ञान का सक्रिय निर्माण करते हैं। विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण का सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है, जबकि अन्य विकल्प इस सिद्धांत की मूल भावना के विपरीत हैं।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) और 'व्यक्त्तिकेंद्रित शिक्षण' (Person-Centered Teaching) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant Experiential Learning) के सिद्धांतों तथा शिक्षक की एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) के रूप में भूमिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धिमत्ता सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतःवैयक्तिक बुद्धिमत्ता' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे उस व्यक्तिपरक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपने स्वयं के आंतरिक भावनाओं, संवेगों, प्रेरणाओं, शक्तियों, कमजोरियों और वैचारिक मानचित्र (Self-reflection and self-awareness) को गहराई से समझता है और अपने जीवन को तदनुसार विनियमित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमन (Self-regulation), metacognition (परासंज्ञान), और भावनात्मक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के 'बुद्धि के द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सामान्य बुद्धि या जी-कारक' (General Intelligence - 'g' factor) की अवधारणा—जिसके तहत यह माना जाता है कि 'g' कारक एक सार्वभौमिक, जन्मजात और अपरिवर्तनीय मानसिक ऊर्जा है जो व्यक्ति के जीवन के सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों, तार्किक समस्याओं और संज्ञानात्मक प्रदर्शनों में समान रूप से निहित होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की जन्मजात बौद्धिक क्षमता के मूल्यांकन, विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) और अकादमिक संप्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality Level) के भीतर आने वाले अंतिम चरण—**'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation - चरण 6)**—जिसके तहत व्यक्ति बाहरी सामाजिक नियमों या कानूनों से ऊपर उठकर अपने स्वयं के विवेक, सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों, मानव अधिकारों और अंतरात्मा की आवाज़ के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक स्वायत्तता, आलोचनात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रिचर्ड अल्बर्ट्स और रॉबर्ट सेल्मैन (Robert Selman) के 'सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण करने के सिद्धांत' (Theory of Social Perspective Taking) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रतिबिंबित या तृतीय-व्यक्ति परिप्रेक्ष्य ग्रहण' (Self-Reflective / Third-Person Perspective Taking)**—जिसे उस विकासात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत लगभग 10 से 15 वर्ष की आयु का बालक यह भली-भांति समझने में सक्षम हो जाता है कि न केवल वह दूसरों के दृष्टिकोण को देख सकता है, बल्कि वह एक तटस्थ 'तृतीय-व्यक्ति' या बाहरी प्रेक्षक की स्थिति से स्वयं के और किसी अन्य व्यक्ति के पारस्परिक दृष्टिकोणों को एक साथ एक ही समय पर वस्तुनिष्ठ (Objective) रूप से देख और मूल्यांकित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक संज्ञान, विकेंद्रीकृत तार्किक क्षमता और सहानुभूतिपूर्ण सह-अस्तित्व के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.