त्वरित लिंक्स
MPTET
3 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस आंतरिक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक मानसिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत यदि कोई जीव या शिक्षार्थी सीखने के लिए पूरी तरह तैयार है, तो उसे कार्य करने में संतोष (Satisfaction) और आनंद की प्राप्ति होती है, और यदि वह तैयार नहीं है और उसे जबरन कार्य कराया जाता है, तो उसे झुंझलाहट या असंतोष (Annoyance) होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की प्रेरणा, परिपक्वता स्तर और संज्ञानात्मक अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
थार्नडाइक के प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत के तीन मुख्य प्राथमिक नियमों में से 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) यह स्पष्ट करता है कि जब तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कार्य करने के लिए तैयार होता है और उसे वैसा अवसर मिलता है, तो कार्य संतोषजनक रूप से संपन्न होता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इसका तात्पर्य यह है कि शिक्षक को विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान, मानसिक परिपक्वता और रुचि (यानी उनकी तत्परता) का आकलन करने के बाद ही नए विषयों का शिक्षण शुरू करना चाहिए, ताकि अधिगम सार्थक और स्थायी हो सके।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन निरूपण पद्धतियों—(1) क्रियात्मक निरूपण (Enactive Representation), (2) दृश्य/प्रतिबिम्बात्मक निरूपण (Iconic Representation), और (3) सांकेतिक निरूपण (Symbolic Representation)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सर्पिल पाठ्यक्रम (Spiral Curriculum) के निर्माण, अमूर्त चिंतन के विकास, और खोजनात्मक अधिगम (Discovery Learning) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'करके सीखना' (Learning by Doing)**—जिसे उस व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित शैक्षणिक उपागम के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ शिक्षार्थी केवल निष्क्रिय श्रोता न बनकर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, परियोजनाओं और सामूहिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, और अपने प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से ज्ञान का निर्माण तथा समस्या-समाधान करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यावहारिक बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, पॉल टोरेन्स (E. Paul Torrance) के 'सृजनात्मक चिंतन के सिद्धांत' (Torrance Tests of Creative Thinking - TTCT) के अंतर्गत प्रतिपादित चार प्रमुख घटकों—(1) प्रवाह (Fluency), (2) लचीलापन (Flexibility), (3) मौलिकता (Originality), और (4) विस्तारण (Elaboration)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अपसारी चिंतन (Divergent Thinking), समस्या-समाधान क्षमताओं, और मौलिक विचारोत्पादक कौशलों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उर्री ब्रॉन्fenbrenner (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकीय प्रणालियों का सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'माइक्रोसिस्टम या सूक्ष्मतंत्र' (Microsystem)**—जिसे उस सबसे भीतरी और प्रत्यक्ष पर्यावरण परत के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके साथ बालक अपने दैनिक जीवन में आमने-सामने की सीधी अंतःक्रिया करता है (जैसे कि परिवार, विद्यालय, सहपाठी समूह और पास-पड़ोस)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक-संवादात्मक विकास, प्रेरणा और व्यक्तिगत अनुभवों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता का चरण या पोस्ट-कन्वेंशनल नैतिकता' (Post-Conventional Morality)**—जिसे उस उन्नत नैतिक तर्क की अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति के नैतिक निर्णय और कार्य सामाजिक नियमों, कानूनों या बाहरी अधिकारियों की अंधी स्वीकृति से ऊपर उठकर व्यक्तिगत अधिकारों, सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों (Universal Human Values) और आंतरिक विवेक (Conscience) द्वारा निर्देशित होते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विन्यास, लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास और स्वतंत्र नैतिक निर्णय-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.