त्वरित लिंक्स
MPTET
2 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रगामी संगठक या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक परिचयात्मक और उच्च-स्तरीय शिक्षण सामग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे शिक्षक किसी नए, जटिल और विस्तृत विषय को पढ़ाने से ठीक पहले प्रस्तुत करता है, ताकि यह शिक्षार्थी की संज्ञानात्मक संरचना में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों (Inclusive Concepts) के साथ नए ज्ञान को जोड़ने (Anchoring) के लिए एक वैचारिक सेतु या पुल का कार्य कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक समावेश, अवधारण (Retention) और संज्ञानात्मक एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड औसुबेल (David Ausubel) के अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत में 'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer) का संप्रत्यय केंद्रीय महत्व रखता है। इसके अनुसार, जब शिक्षक मुख्य पाठ पढ़ाने से पहले एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और परिचयात्मक सामग्री प्रस्तुत करता है, तो यह विद्यार्थियों के मस्तिष्क में पहले से मौजूद स्कीमा या ज्ञान (Cognitive Structure) के साथ नए ज्ञान को मजबूती से जोड़ने (Anchoring) का काम करता है। इससे रटन अधिगम (Rote Learning) हतोत्साहित होता है और अर्थपूर्ण अधिगम (Meaningful Learning) को बढ़ावा मिलता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैने (Robert Gagné) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर के अधिगम यानी 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning) तथा उससे ठीक पूर्व के स्तर 'सिद्धांत अधिगम' (Rule Learning) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, तार्किक नियमों के सामान्यीकरण, और जटिल बौद्धिक कौशलों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning) की अवधारणा—जिसके तहत यह उच्चतम स्तर का अधिगम (आठवाँ स्तर) है जहाँ शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करके एक नई, जटिल और अनपेक्षित समस्या का तार्किक समाधान खोजता है तथा संज्ञानात्मक नियमों का पुनर्गठन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल, स्वतंत्र चिंतन और सृजनात्मकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Sociocultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मचान या ढांचागत सहयोग' (Scaffolding)**—जिसे उस अस्थायी और गतिक शैक्षिक सहायता के रूप में परिभाषित किया जाता है जो एक अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) द्वारा शिक्षार्थी को उसकी 'समीपस्थ विकास के क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) के भीतर प्रदान की जाती है, और जैसे-जैसे शिक्षार्थी उस कार्य को स्वतंत्र रूप से करने में सक्षम होता जाता है, उस सहायता या ढांचे को धीरे-धीरे हटा लिया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवादात्मक अधिगम, संज्ञानात्मक स्वायत्तता और समस्या-समाधान क्षमता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा एवं अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'करके सीखना' (Learning by Doing) और 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षा केवल भविष्य की तैयारी नहीं है बल्कि जीवन की एक प्रक्रिया है, और वास्तविक ज्ञान विद्यार्थियों द्वारा वास्तविक जीवन की समस्याओं का सामना करते हुए वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Inquiry) के माध्यम से अपने अनुभवों का पुनर्निर्माण (Reconstruction of Experience) करने से प्राप्त होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रजातांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक समस्या-समाधान (Critical Problem Solving) और स्वायत्त ज्ञानार्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उरी ब्रॉन्फेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकी प्रणालियों के सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मेसोसिस्टम या मध्य-प्रणाली' (Mesosystem)**—जिसे उस अंतःसंबंधों के क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति के विभिन्न लघुतंत्रों (Microsystems) यानी उसके प्राथमिक जीवन के परिवेशों (जैसे परिवार, विद्यालय, साथियों का समूह और पड़ोस) के बीच होने वाली अंतःक्रियाएं और संबंध शामिल होते हैं, जहाँ एक प्रणाली का अनुभव (जैसे माता-पिता और शिक्षकों के बीच संवाद) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दूसरी प्रणाली में बच्चे के विकास और अधिगम को गहराई से प्रभावित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, सामाजिक समायोजन और सहयोगात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.