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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory / Social Cognitive Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्व-प्रभाविता या सेल्फ-इफिकेसी' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास या आत्म-धारणा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति किसी विशिष्ट परिस्थिति में अपने कार्यों को सफलतापर्वूक निष्पादित करने, चुनौतियों का सामना करने और अपने वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने की अपनी व्यक्तिगत क्षमता पर भरोसा करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा प्रबंधन, शैक्षणिक दृढ़ता और आत्म-नियमन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम (तथा संज्ञानात्मक) सिद्धांत के अनुसार, 'स्व-प्रभाविता' (Self-Efficacy) व्यक्ति का अपनी उन क्षमताओं में विश्वास है जो विशिष्ट कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। जिन विद्यार्थियों में उच्च स्व-प्रभाविता होती है, वे कठिन लक्ष्यों को चुनते हैं, असफलताओं के बावजूद डटे रहते हैं और अपने प्रयासों को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं। इसके विपरीत, निम्न स्व-प्रभाविता वाले छात्र चुनौतियों से बचते हैं और अपनी योग्यताओं पर संदेह करते हैं। अतः विकल्प (ए) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एरिक एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास के सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'पहचान बनाम भूमिका भ्रम' (Identity vs. Role Confusion - किशोरावस्था, लगभग 12 से 18 वर्ष)** की अवस्था के भीतर निहित **'मनोवैज्ञानिक मोरेटोरियम' (Psychosocial Moratorium)** की अवधारणा—जिसके तहत किशोरावस्था के दौरान समाज युवाओं को अपने वयस्क दायित्वों और कैरियर की कठोर प्रतिबद्धताओं से एक अस्थायी छूट या 'छूट का समय' देता है ताकि वे विभिन्न भूमिकाओं, मूल्यों, विचारधाराओं और आत्म-छवियों का सुरक्षित रूप से प्रयोग और अन्वेषण (Exploration) कर सकें—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्तता विकास, आत्म-पहचान के निर्माण औरशोधात्मक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतरा-वैयक्तिक बुद्धि या इंट्रापर्सनल इंटेलिजेंस' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपने स्वयं के आंतरिक भावों, भावनाओं, प्रेरणाओं, कमजोरियों, शक्तियों, इच्छाओं और मानसिक अवस्थाओं को सूक्ष्मता से समझने, उनका सटीक आकलन करने और अपने व्यवहार को तदनुसार विनियमित करने की उच्च योग्यता रखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-प्रबंधन, स्व-जागरूकता (Self-Awareness) और भावनात्मक नियमन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map) की अवधारणा तथा 'अव्यक्त अधिगम' (Latent Learning) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उद्देश्यपूर्ण व्यवहार, स्थान-अधिगम (Place Learning), और आंतरिक प्रतिनिधित्व के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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