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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रीनहोल्ड बोय्स (Reinhold Boehm) या सामान्यतः शैक्षिक मनोविज्ञान में चर्चित **'कार्यात्मक निश्चितता और आंतरिक विमर्श' (Reflective Practice / Reflective Teaching)** की अवधारणा—जिसे डोनाल्ड शॉन (Donald Schön) द्वारा प्रतिपादित 'क्रिया में चिंतन' (Reflection-in-action) और 'क्रिया पर चिंतन' (Reflection-on-action) के रूप में भी विस्तारित किया गया है—के अंतर्गत एक शिक्षक अपनी शिक्षण पद्धतियों, कक्षा की अंतःक्रियाओं और विद्यार्थियों की अधिगम बाधाओं का गंभीर, तार्किक और स्व-समीक्षात्मक मूल्यांकन करता है ताकि वह अपनी कक्षा में केवल एक पारंपरिक अनुदेशक न बनकर एक 'चिंतक-व्यवसायी' (Reflective Practitioner) के रूप में कार्य कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सार्थक संज्ञान, समस्या-समाधान और उच्च-स्तरीय अधिगम परिणामों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) की बाल विकास और शिक्षाशास्त्र पद्धति के अनुसार, 'चिंतक-व्यवसायी' (Reflective Practitioner) और 'चिंतनशील शिक्षण' (Reflective Teaching) का मुख्य उद्देश्य शिक्षक की स्व-समीक्षात्मक क्षमता को बढ़ाना है। डोनाल्ड शॉन के सिद्धांत के अनुसार, जब शिक्षक 'क्रिया में चिंतन' और 'क्रिया पर चिंतन' करता है, तो वह अपनी शिक्षण विधियों की कमियों को पहचानकर विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं और आवश्यकताओं के अनुसार उनमें सुधार करता है। विकल्प (b) इस अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक निहितार्थ को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है, जबकि अन्य विकल्प इसके विपरीत या सीमित प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोज अधिगम सिद्धांत' (Cognitive Development & Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सर्पिल पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस उत्कृष्ट शैक्षणिक व पाठ्यक्रम डिजाइन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें किसी विषय या मूल अवधारणा को प्रारंभिक स्तर पर सरल और सहज रूप से (सहज बोध के माध्यम से) प्रस्तुत किया जाता है और जैसे-जैसे विद्यार्थी उच्च कक्षाओं में आगे बढ़ता है, उसी अवधारणा को अधिक परिष्कृत, अमूर्त, जटिल और औपचारिक तार्किक रूपों में बार-बार गहराई के साथ पुनरावृत्ति और विस्तार दिया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा पुनर्निर्माण, सतत ज्ञान संचयन और अमूर्त चिंतन क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) तथा 'सुविधाजनक शिक्षण' (Facilitative Teaching) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'आत्म-प्रत्यय' (Self-Concept), गैर-निर्देशात्मक शिक्षण (Non-directive Teaching), और आंतरिक प्रेरणा के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी शिक्षण सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सुगमकर्ता या फैसिलिटेटर के रूप में शिक्षक' (Teacher as a Facilitator)**—जिसे उस लोकतांत्रिक और सहानुभूतिपूर्ण शैक्षणिक भूमिका के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक कक्षा में ज्ञान थोपने वाले या सत्तावादी नियंत्रक के रूप में कार्य करने के बजाय एक ऐसे मार्गदर्शक, सहायक और सुरक्षित मनोवैज्ञानिक वातावरण के प्रस्तोता की भूमिका निभाता है जो शिक्षार्थी की आंतरिक जिज्ञासा, स्वायत्तता और आत्म-निर्देशित अधिगम (Self-Directed Learning) को स्वाभाविक रूप से पोषित और प्रोत्साहित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक संवर्धन, सार्थक अनुभवात्मक ज्ञान और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोज अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage)**—जिसके तहत बच्चा या शिक्षार्थी वस्तुओं या छवियों से आगे बढ़कर ज्ञान को प्रस्तुत करने के लिए अमूर्त प्रतीकों, भाषा, तार्किक संकेतों और गणितीय चिह्नों का उपयोग करना सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक संप्रत्ययीकरण और उच्च-स्तरीय बौद्धिक प्रसंस्करण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान विकसित होने वाली प्रमुख संज्ञानात्मक क्षमता —'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)— की अवधारणा, जिसके तहत बालक यह भली-भांति समझ जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या विन्यास में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या भार अपरिवर्तित (Constant) रहते हैं, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विन्यास, विकेंद्रीकरण (Decentration) और मानसिक संचालनों (Mental Operations) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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