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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, मूक और बधिक विद्यार्थियों (Hearing-Impaired Learners) के शिक्षण हेतु भाषा अधिग्रहण और संज्ञानात्मक विकास के क्षेत्र में प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संप्रत्यय—**'द्विभाषी-द्वि-सांस्कृतिक उपागम' (Bilingual-Bicultural Approach / Bi-Bi Approach)**—जिसे उस शैक्षिक पद्धति के रूप में परिभाषित किया जाता है जो सांकेतिक भाषा (Sign Language, जैसे- ISL) को बधिक बच्चों की प्रथम या प्राथमिक भाषा (L1) के रूप में मान्यता देती है और स्थानीय/लिखित मौखिक भाषा (जैसे- हिंदी या अंग्रेजी) को द्वितीय भाषा (L2) के रूप में विकसित करती है, साथ ही बधिर संस्कृति (Deaf Culture) के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और गौरव का पोषण करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में ऐसे विद्यार्थियों के भाषाई समावेशन, अमूर्त चिंतन और सामाजिक-सांस्कृतिक तादात्म्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
द्विभाषी-द्वि-सांस्कृतिक (Bi-Bi) उपागम बाल विकास और समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में बधिक (Hearing-Impaired) विद्यार्थियों के लिए सबसे वैज्ञानिक और प्रभावी पद्धतियों में से एक माना जाता है। इसके तहत सांकेतिक भाषा को बच्चों की प्राकृतिक प्रथम भाषा (L1) माना जाता है, जो उनकी संज्ञानात्मक और भाषाई नींव को मजबूत करती है। जब बच्चे अपनी प्रथम भाषा में वैचारिक स्पष्टता प्राप्त कर लेते हैं, तो लिखित या मौखिक द्वितीय भाषा (L2) को सीखना उनके लिए अत्यंत सहज और सुगम हो जाता है। इसके अलावा, यह उपागम बधिर संस्कृति (Deaf Culture) को सम्मानित करते हुए विद्यार्थियों में सकारात्मक आत्म-छवि, उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन और सामाजिक-सांस्कृतिक समायोजन का प्रभावी विकास करता है। अतः विकल्प (b) पूर्णतः प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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