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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकालीन उपबंधों (भाग XVIII, अनुच्छेद 352-360) और महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को अंतःस्थापित किया गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जाएगी जब मंत्रिमंडल (Cabinet) का ऐसा निर्णय लिखित रूप में उसे संसूचित किया जाए।
- 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकती है, और इसके साथ ही आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को भी राष्ट्रपति के आदेश द्वारा निलंबित किया जा सकता है।
- 3. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से यह उपबंध किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को न्यायपालिका द्वारा किसी भी आधार पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर रखा जाएगा, किंतु बाद में 44वें संविधान संशोधन द्वारा इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि आपातकाल की उद्घोषणा mala fide (दुर्भावनापूर्ण) होने पर उसकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: मोरारजी देसाई सरकार के दौरान लाए गए 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 से 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटा दिया गया क्योंकि इसका दुरुपयोग किया जा सकता था और इसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' को आधार बनाया गया। साथ ही, प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह पर आपातकाल लगाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए यह अनिवार्य किया गया कि मंत्रिमंडल (Cabinet) का लिखित निर्णय मिलने पर ही राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा करेंगे। कथन 2 गलत है क्योंकि संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में आपातकाल लागू करने का प्रावधान 42वें संशोधन द्वारा नहीं, बल्कि 42वें संशोधन में राष्ट्रपति को पूरे देश में आपातकाल लगाने की शक्ति दी गई थी, जबकि 'संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग' (Flexible application) का प्रावधान वस्तुतः 38वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था; इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को किसी भी स्थिति में निलंबित **नहीं** किया जा सकता है (यह प्रावधान 44वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था)। कथन 3 सही है: 38वें संविधान संशोधन 1975 द्वारा आपातकाल की घोषणा को न्यायिक समीक्षा से मुक्त किया गया था, जिसे 44वें संशोधन 1978 द्वारा निरस्त कर दिया गया। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर जाएँ।
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किए जाने के उपरांत, राज्यों को पंचायती राज व्यवस्था के संबंध में कई विधायी अधिकार दिए गए हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत राज्यों को यह शक्ति दी गई है कि वे पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकें जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसके अंतर्गत ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में से सभी विषयों पर विधि निर्माण का अधिकार अनिवार्य रूप से राज्य सरकारों को सौंपना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है।
2. अनुच्छेद 243-H के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, किसी पंचायत को उसके द्वारा संग्रहित और विनियोजित किए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस के आरोपण और संग्रहण के लिए अधिकृत कर सकता है, तथा राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता अनुदान (Grants-in-aid) देने का प्रावधान भी कर सकता है।
3. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पांचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को उन सिद्धांतों के बारे में संस्तुति करेगा जो पंचायतों और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण को विनियमित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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मौलिक अधिकार का रक्षक?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है, किंतु जिस राज्य की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, उस राज्य के लिए मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करना अनिवार्य नहीं है।
2. अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के क्रियान्वयन की शक्ति सौंपी गई है, और इन विषयों पर विधि बनाने की शक्ति केवल संसद के पास निहित है।
3. अनुच्छेद 243-E के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष का होता है, और यदि किसी पंचायत को समय से पूर्व विघटित कर दिया जाता है, तो विघटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है, बशर्ते पंचायत का शेष कार्यकाल छह मास से कम का न हो।
4. 73वें संविधान संशोधन के द्वारा प्रत्येक राज्य में एक राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसका प्रमुख राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है, और उसे उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों के विनियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और अंग्रेजी भाषा इन 22 भाषाओं में शामिल नहीं है।
2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) राजनीतिक दलों का पंजीकरण करता है, किंतु एक बार पंजीकृत होने के बाद निर्वाचन आयोग को किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने या वापस लेने की वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून), जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि यदि सदन का कोई सदस्य अपने राजनीतिक दल के व्हिप (Whip) के विरुद्ध सदन में मतदान करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में पीठासीन अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होता है जिसकी न्यायिक समीक्षा किसी भी न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की स्थापना संविधान के किस अनुच्छेद के तहत की गई है?
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