BaalVikas
Menu
Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 24 times

भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को अंगीकृत किया गया था, जो आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
  2. 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को वर्ष 1917 की रूसी क्रांति (Russian Revolution) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था।
  3. 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके माध्यम से संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' को संविधान सभा ने 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया था, जो भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना। प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, जबकि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श को 1917 की रूसी क्रांति से लिया गया है। मूलतः 'बेरुबेरी यूनियन वाद' (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तावना को संविधान का अंग नहीं माना था, किंतु 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है बशर्ते मूल ढांचा प्रभावित न हो। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्यायों को पढ़ें।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं के विभिन्न… ← पिछला प्रश्न भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)…

Related Questions

→ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा इनमें से प्रत्येक सदस्य छह वर्ष की अवधि के लिए या पैंसठ वर्ष (UPSC) एवं बासठ वर्ष (SPSC) की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपने पद पर धारण करता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के उपबंधों के तहत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राष्ट्रपति द्वारा उनके दुराचार (Misbehaviour) के आधार पर हटाया जा सकता है, भले ही नियुक्ति राज्यपाल ने की हो, और इसके लिए उच्चतम न्यायालय की जाँच अनिवार्य होती है। 3. अनुच्छेद 318 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों को विनियमित करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास निहित है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के संदर्भ में यह अनन्य शक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत ने पारित किया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव तब तक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता जब तक कि इस आशय के प्रस्ताव की कम से कम चौदह दिन की पूर्व सूचना न दी गई हो। 2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के पश्चात प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 3. सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि मंत्रिमंडल का कोई भी निर्णय यदि संसद के किसी एक सदन में भी अस्वीकृत हो जाए, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं के गठन, संरचना और वार्ड समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में हर शहरी क्षेत्र के लिए (क) छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद, और (घ) बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाएगा, किंतु यदि किसी ऐसे शहरी क्षेत्र में या उसके किसी भाग में औद्योगिक स्थापनाएँ विद्यमान हैं, जिन्हें नगरपालिका सेवाएँ प्रदान करने या स्थापित करने के लिए उपयुक्त समझा जाए, तो राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को औद्योगिक नगरी (Industrial Township) के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकेगा और वहाँ नगरपालिकाओं का गठन करना अनिवार्य नहीं होगा। 2. अनुच्छेद 243-S के प्रावधानों के तहत तीन लाख या उससे अधिक की जनसंख्या वाले प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र के भीतर एक या एक से अधिक वार्डों को मिलाकर एक या अधिक 'वार्ड समितियों' (Ward Committees) का गठन किया जाएगा, जिनकी संरचना और गठन से संबंधित नियम बनाने की शक्ति राज्य के राज्यपाल के पास अनन्य रूप से निहित है। 3. 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान में नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) जोड़ी गई है, जिसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 18 विषयों को नगरपालिकाओं की विधाई शक्तियों के अंतर्गत हस्तांतरित करने का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IV-A के अनुच्छेद 51A में जोड़ा गया था, और मूल रूप से संविधान में 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे। 2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य माता-पिता या संरक्षक का होगा। 3. ये मूल कर्तव्य न केवल भारत के नागरिकों पर लागू होते हैं, बल्कि भारतीय क्षेत्र में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों (Foreigners) पर भी वैधानिक रूप से समान रूप से बाध्यकारी होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.