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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा में इसे प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, तथा राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकार या संशोधित नहीं कर सकती है, वह केवल अपनी सिफारिशें दे सकती है जिन्हें मानना या न मानना लोकसभा पर निर्भर करता है।
  2. 2. संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत केवल साधारण विधेयकों (Ordinary Bills) और वित्तीय विधेयकों (Financial Bills श्रेणी-I) के संदर्भ में लागू होता है, किंतु यह संविधान संशोधन विधेयकों (Constitutional Amendment Bills) और धन विधेयकों (Money Bills) के मामले में लागू नहीं किया जा सकता है।
  3. 3. लोकसभा द्वारा पारित और राज्यसभा को भेजे गए किसी साधारण विधेयक पर यदि दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो जाता है और राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत की जाती है, तो उस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से लोकसभा अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) द्वारा ही की जाती है, और यदि वह अनुपस्थित हो तो राज्यसभा के सभापति द्वारा की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 109 में धन विधेयक की प्रक्रिया का वर्णन है, किंतु अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है। राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकार नहीं कर सकती और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, वह केवल सिफारिशें दे सकती है, लेकिन अनुच्छेद 109 यह स्पष्ट करता है कि धन विधेयक 'केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है'—यह बात सही है, किंतु अनुच्छेद 109 और अनुच्छेद 107 के अनुसार वित्तीय मामलों की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए यह जानना आवश्यक है कि धन विधेयक के अलावा सामान्य वित्तीय विधेयक (Financial Bills) दोनों सदनों में प्रस्तुत हो सकते हैं। कथन 2 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों और अनुच्छेद 117(1) वाले वित्तीय विधेयकों (श्रेणी-1) के लिए है। संविधान संशोधन विधेयक (अनु अनुच्छेद 368) और धन विधेयक के मामले में संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है। संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों को अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित करना अनिवार्य होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि संयुक्त बैठक की अध्यक्षता केवल लोकसभा अध्यक्ष करता है; यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित है, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) उसकी अध्यक्षता करता है। यदि उपाध्यक्ष भी अनुपस्थित है, तो राज्यसभा का उपसभापति (Deputy Chairman) अध्यक्षता करता है। राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते क्योंकि वे सदन के सदस्य नहीं होते हैं। भारतीय संसद की कार्यप्रणाली के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
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'मिनर्वा मिल्स वाद' (1980) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि भाग-III (मूल अधिकार) और भाग-IV (नीति निर्देशक तत्व) एक-दूसरे के पूरक हैं, और यदि नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए मूल अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 14 और 19) में संशोधन किया जाता है, तो ऐसा कोई भी कानून संविधान के मूल ढांचा (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। 3. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और न्यायपालिका द्वारा प्रवर्तनीय (Non-justiciable) नहीं हैं, तथापि उच्चतम न्यायालय ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों में यह प्रतिपादित किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) की व्यापक व्याख्या करते समय नीति निर्देशक तत्वों में निहित कल्याणकारी संकल्पनाओं को इसके अंतर्गत शामिल किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 तथा पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के ऐतिहासिक प्रावधानों और उनके प्रशासनिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, किंतु गवर्नर-जनरल को इस परिषद के बहुमत के निर्णयों को पलटने की वीटो शक्ति प्राप्त नहीं थी, जिससे वॉरेन हेस्टिंग्स को अपने प्रशासनिक कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के माध्यम से कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई जो ब्रिटिश कैबिनेट के नियंत्रण में राजनीतिक मामलों को देखता था, जबकि वाणिज्यिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) को बरकरार रखा गया। 3. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के प्रावधानों के अंतर्गत वर्ष 1774 में कलकत्ता के फोर्ट विलियम में स्थापित उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के पास बंगाल, बिहार और उसाड़ (उड़ीसा) के सभी ब्रिटिश विषयों पर पूर्ण अधिकारिता थी, और इस न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध सीधे कलकत्ता की गवर्नर-जनरल काउंसिल में अपील की जा सकती थी, न कि ब्रिटेन की प्रिवी काउंसिल में। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था। 2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। 3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है। 2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो। 3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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