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Indian Polity
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों के लिए ब्रिटिश भारत के प्रांतों से चुनाव हुए थे, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, जबकि रियासतें (Princely States) अपनी स्वेच्छा से संविधान सभा में शामिल होने के कारण शुरुआती दौर में इस निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा थीं।
  2. 2. संविधान सभा के प्रथम सत्र (9 दिसंबर 1946) का मुस्लिम लीग द्वारा बहिष्कार किया गया था, जिसके कारण सभा के अस्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया, जो सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे, और यह फ्रांसीसी प्रथा पर आधारित था।
  3. 3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण हेतु कुल 22 प्रमुख समितियों का गठन किया गया था, जिसमें संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे, जिसमें कुल सदस्यों की संख्या अध्यक्ष सहित सात थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि रियासतें (Princely States) शुरुआत में संविधान सभा की निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि उन्हें संविधान सभा में शामिल होने या न होने का विकल्प दिया गया था और उनके प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था, न कि निर्वाचन द्वारा। कथन 2 सत्य है क्योंकि 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया और फ्रांस की पद्धति का अनुसरण करते हुए सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था। कथन 3 सत्य है क्योंकि संविधान सभा ने संविधान के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया था, जिनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद संचालन समिति के अध्यक्ष थे और 29 अगस्त 1946 को गठित 'प्रारूप समिति' के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे, जिसमें कुल 7 सदस्य (अध्यक्ष सहित) शामिल थे। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत वर्णित मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके प्रवर्तन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत 'संवैधानिक उपचारों का अधिकार' एक मूल अधिकार है, जिसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य उद्देश्य (जैसे सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है। 2. अनुच्छेद 34 के तहत 'सैनिक शासन' (Martial Law) लागू होने के दौरान संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी क्षेत्र में सेना या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किए गए किसी कार्य को वैध बनाने के लिए संसद द्वारा कानून बनाकर क्षतिपूर्ति (Indemnity) का उपबंध कर सकती है, तथा इस प्रकार की क्षतिपूर्ति का कानून बनाने की शक्ति राज्य विधानमंडलों के पास भी होती है। 3. अनुच्छेद 35 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि भाग III के कुछ विशेष मूल अधिकारों (जैसे अनुच्छेद 16(3), अनुच्छेद 32(3), अनुच्छेद 33 और अनुच्छेद 34) को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने की शक्ति केवल और केवल संसद के पास निहित होगी, किसी भी राज्य के विधानमंडल के पास नहीं, भले ही वह विषय राज्य सूची (State List) के अंतर्गत ही क्यों न आता हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान में 'संसद की जननी' किसे कहा जाता है? वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन हर कितने वर्षों पर होता है? ऊर्जा के प्रवाह का "10 प्रतिशत नियम" किसने दिया था? भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और उससे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 14 दो अवधारणाओं—'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) और 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal Protection of Laws) का प्रावधान करता है, जिसमें से 'विधि के समक्ष समता' का विचार ब्रिटिश संविधान से लिया गया है और यह एक 'नकारात्मक अवधारणा' है, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' का विचार अमेरिकी संविधान से लिया गया है और यह एक 'सकारात्मक अवधारणा' है। 2. अनुच्छेद 16(4) के अंतर्गत राज्य को पिछड़े वर्गों के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए प्रावधान करने की शक्ति दी गई है, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'इन्दिरा साहनी वाद (1993)' में यह स्पष्ट किया गया था कि आरक्षण की यह व्यवस्था केवल प्रारंभिक नियुक्तियों तक ही सीमित है तथा इसे पदोन्नति (Promotion) के मामलों में बिल्कुल भी लागू नहीं किया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 18 के तहत उपाधियों का अंत किया गया है, जिसके अनुसार सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अतिरिक्त राज्य कोई भी उपाधि प्रदान नहीं करेगा, तथा भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बिना कोई भी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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