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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करते हैं, और वर्ष 1993 के बाद से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की शक्तियां और वेतन-भत्ते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं और निर्णयों में मतभेद होने पर बहुमत से निर्णय लिया जाता है।
  2. 2. वर्ष 1990 में स्थापित 'दिनेश गोस्वामी समिति' ने चुनाव सुधारों पर अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन से वित्तपोषित चुनाव प्रचार (State Funding of Elections) का समर्थन किया था तथा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की सिफारिश की थी।
  3. 3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत एक उम्मीदवार को अधिकतम दो संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है, और यदि कोई उम्मीदवार दोनों सीटों पर विजयी होता है, तो उसे छह महीने के भीतर एक सीट खाली करनी होती है, तथा उपचुनाव का खर्च संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा वहन किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर नियुक्त अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलकर बनता है। 16 अक्टूबर 1993 से यह बहु-सदस्यीय निकाय बना। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (अब चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तें मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 द्वारा विनियमित होती हैं, किंतु मूल संवैधानिक प्रावधान के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा प्राप्त है) के पास समान शक्तियां हैं और मतभेद की स्थिति में बहुमत से निर्णय होता है। कथन 2 गलत है: दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने राज्य द्वारा चुनाव खर्च के आंशिक वित्तपोषण का समर्थन तो किया था, लेकिन इसने EVM के प्रयोग को समाप्त करने की नहीं बल्कि चुनावों में EVM के व्यापक उपयोग का समर्थन किया था। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत उम्मीदवार अधिकतम दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है, किंतु उपचुनाव का खर्च मतदाताओं द्वारा नहीं बल्कि सरकार द्वारा वहन किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के अध्यायों का अध्ययन करें।
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