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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और राज्यसभा को इस विधेयक को पारित करने या अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिकतम 14 दिन की समय-सीमा दी गई है, जिसके भीतर यदि राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जैसा लोकसभा ने पारित किया था।
  2. 2. अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत ऐसा वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-I) जिसमें अनुच्छेद 110 के उपबंधों के अलावा अन्य विषय भी शामिल हैं, केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है, किंतु इस प्रकार के विधेयक को पारित कराने के मामले में लोकसभा और राज्यसभा दोनों की शक्तियाँ पूर्णतः समान होती हैं और गतिरोध की स्थिति में संयुक्त बैठकों (Joint Sitting) का प्रावधान लागू किया जा सकता है।
  3. 3. अनुच्छेद 117(3) के तहत आने वाले वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II) को संसद के किसी भी सदन में बिना राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति के भी पुनः स्थापित किया जा सकता है, किंतु ऐसे विधेयक को कानून का रूप देने के लिए यह अनिवार्य है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने से पूर्व राष्ट्रपति उसकी संस्वीकृति प्रदान कर दें।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 109 के तहत धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है और राज्यसभा के पास इसे अस्वीकार करने या संशोधित करने की शक्ति नहीं होती; उसे केवल 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें भेजनी होती हैं। यदि वह ऐसा नहीं करती, तो विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत आने वाले वित्तीय विधेयक (श्रेणी-I) को केवल राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति से लोकसभा में पेश किया जा सकता है, लेकिन इसे पारित करने में दोनों सदनों की शक्तियाँ समान होती हैं और गतिरोध पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। कथन 3 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 117(3) के तहत आने वाले वित्तीय विधेयक (श्रेणी-II) को संसद के किसी भी सदन में पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति आवश्यक नहीं होती है, बल्कि उसे सदन में विचार के लिए प्रस्तुत करने के समय राष्ट्रपति की संस्वीकृति की आवश्यकता होती है जब विधेयक पर मतदान होना हो। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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