Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 21 times
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस संशोधन द्वारा संविधान में 'भाग IX-क' जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगरपालिकाओं के क्षेत्राधिकार के लिए 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
- 2. अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल को यह शक्ति दी गई है कि वह किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रदत्त या प्रदान की जाने वाली सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उस नगरीय क्षेत्र को नगरपालिका क्षेत्र घोषित करने से छूट दे सकता है और वहाँ 'औद्योगिक नगरी' (Industrial Township) स्थापित कर सकता है।
- 3. अनुच्छेद 243-S के तहत प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन किया जाना आवश्यक है, और यह प्रावधान उन सभी राज्यों पर अनिवार्य रूप से लागू होता है जिनकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, तथा इसमें राज्य के विधानमंडल की कोई विवेककारी शक्ति नहीं है।
- 4. अनुच्छेद 243-W के अनुसार राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों से संबंधित योजनाओं को तैयार करने और उनका क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं को सौंपी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में भाग IX-क (अनुच्छेद 243-P से 243-ZG) और बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें नगरपालिकाओं के लिए 18 विषय शामिल हैं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 243-Q के तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) का गठन होता है, और राज्यपाल को औद्योगिक क्षेत्रों में 'औद्योगिक नगरी' (Industrial Township) स्थापित करने की शक्ति प्राप्त है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 243-S के अनुसार वार्ड समितियों का गठन केवल उन्हीं नगरपालिका क्षेत्रों में अनिवार्य है जिनकी जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है, किंतु यह राज्य विधानमंडल की विधि द्वारा निर्धारित होता है, और इसमें राज्यों के लिए कुछ अपवाद भी हो सकते हैं, साथ ही यहाँ कथन में 'तीन लाख' की सीमा सही है लेकिन यह विधानमंडल के नियमन के अधीन है, तथापि कथन 3 की कठोर अनिवार्यता और विधानमंडल की शक्ति के संदर्भ में यह आंशिक रूप से भ्रामक है। अधिक अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं। कथन 4 सही है: अनुच्छेद 243-W राज्य विधानमंडल को यह प्राधिकार देता है कि वह नगरपालिकाओं को स्वशासन की संस्था के रूप में कार्य करने हेतु आवश्यक शक्तियां प्रदान करे। अतः केवल कथन 1, 2 और 4 सही हैं।
अगला प्रश्न →
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता (Appellate…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा…
Related Questions
→
भारतीय संविधान के भाग-II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और यह नियम युद्धकाल या शांति काल दोनों ही परिस्थितियों में समान रूप से प्रभावी होता है।
2. अनुच्छेद 10 के तहत प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के प्रावधानों के अनुसार भारत का नागरिक है या माना जाता है, वह संसद द्वारा बनाई जाने वाली किसी भी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा, जिसका अर्थ है कि नागरिकता के अधिकार की निरंतरता पूरी तरह से संसद के कानूनों के अधीन है।
3. अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विनियमन करने की पूर्ण शक्ति प्रदान करता है, किंतु संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि संसद इस शक्ति का प्रयोग केवल संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368) के माध्यम से ही कर सकती है, साधारण कानून बनाकर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे संसद में किसी भी स्थिति में मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपनी पदमुक्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए संविधान द्वारा पूर्णतः पात्र (Eligible) घोषित किया गया है, क्योंकि उसका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसकी स्वतंत्रता पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है।
3. अनुच्छेद 149 के तहत CAG संसद द्वारा बनाई गई विधि के अनुसार संघ और राज्यों के लेखाओं के संबंध में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, और CAG की रिपोर्टों की संवीक्षा करने की मुख्य जिम्मेदारी संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) द्वारा निभाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसमें अनुच्छेद 243 से 243O तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके अंतर्गत ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों के क्षेत्राधिकार के लिए 29 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
2. अनुच्छेद 243B के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिस राज्य की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, वह राज्य मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन न करने का विकल्प चुन सकता है।
3. अनुच्छेद 243D के तहत प्रत्येक पंचायत में महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर कुल सीटों की संख्या के कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित होनी आवश्यक हैं, और यह आरक्षण प्रत्यक्ष रूप से चुने जाने वाले स्थानों तक ही सीमित है तथा अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर लागू नहीं होता है।
4. संविधान के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष का होता है, और यदि किसी कारणवश पंचायत का समय से पूर्व विघटन हो जाता है, तो विघटन की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है, बशर्ते कि विघटन के पश्चात शेष अवधि छह महीने से कम की हो तो नए चुनाव कराना आवश्यक नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत भारतीय नागरिकता के प्रावधानों और संसद की नागरिकता संबंधी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, किंतु यह नियम उन परिस्थितियों में लागू नहीं होता जब भारत युद्ध की स्थिति में हो।
2. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को यह स्पष्ट अधिकार दिया गया है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विनियमन करने के लिए कोई भी विधि बना सकती है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' (Citizenship Act, 1955) पारित किया था।
3. अनुच्छेद 10 के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों के तहत नागरिक है या माना जाता है, वह संसद द्वारा बनाई जाने वाली किसी भी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए नागरिक बना रहेगा, जिसका अर्थ है कि नागरिकता का अधिकार संसद की विधायी शक्ति और विधियों के अधीन अनन्य रूप से सुरक्षित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.